जागरण संवाददाता, कोलकाता। केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय आवास योजना का सोशल ऑडिट कराने का निर्णय लिया है, ताकि योजना के तहत निर्मित आवासों के आंकड़ों को एकत्रित किया जा सके। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा योजना केसोशल ऑडिट की बात से ममता सरकार की मुश्किलें बढ़नी तय मानी जा रही है।

दरअसल, राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के नेताओं को तमाम परियोजना से लाभांवित कराने के एवज में लिए गए कटमनी (कमीशन) को लौटने का निर्देश दिया था। इसके बाद से ही आए दिन कटमनी को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। इतना ही नहीं, राज्य सचिवालय के शिकायत प्रकोष्ठ में सबसे अधिक शिकायतें आवास योजना में धांधली से संबंधित दर्ज की गई हैं।

प्रतिनिधियों ने गटक ली है राशि

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ज्यादातर क्षेत्रों में आवास योजना की आधे से अधिक रकम स्थानीय नगर निगम, नगरपालिका व पंचायत प्रतिनिधियों ने गटक लिए हैं। इससे संबंधित एक पत्र राज्य के पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के साथ-साथ जिला अधिकारियों को भी भेजा गया है, जिसमें आवास योजना की सोशल ऑडिट का निर्देश दिया गया है। आदिवासी, अल्पसंख्यक, दलित, महादलित, बहुसंख्यक समेत विभिन्न समुदायों के विशिष्टजनों को सोशल ऑडिट टीम में शामिल किया जाएगा। आवास योजना से जुड़े किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी को इसका हिस्सा नहीं बनाने का निर्देश है।

ऐसे करेंगे ऑडिट

केंद्र की टीम ग्रामीण अंचलों व शहरी मोहल्ले का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करेगी। जिन लोगों को भी आवास योजना के तहत पंजीकृत किया गया है या जिन्हें धनराशि दी गई है और जिन लोगों ने भी आवेदन किया है, उन सभी के साथ सोशल ऑडिट की टीम बात करेगी कि किसे कितने रुपये मिले हैं और उन्हें इसके एवज में कितनी रिश्वत देनी पड़ी है।

यह है केंद्रीय आवास योजना

केंद्रीय आवास योजना के तहत केंद्र सरकार प्रति व्यक्ति एक लाख 20 हजार रुपये की धनराशि आंवटित करती है। इसके अलावा उपभोक्ता अगर चाहे तो उन्हें मामूली शर्तो पर 70 हजार का अतिरिक्त ऋ ण भी दिया जाता है। साथ ही शौचालय निर्माण को 12 हजार की धनराशि मुहैया कराई जाती है।

पहले भी आवास योजना का अलग से सोशल ऑडिट हो चुका है। अब एक बार फिर अगर केंद्र सरकार करना चाहती है तो करे, इससे राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।

-सुब्रत मुखर्जी, मंत्री, बंगाल सरकार।

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Posted By: Sachin Mishra

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