जागरण संवाददाता, कोलकाता : न्यूटाउन इलाके में विजयादशमी के दिन अभिषेक मंडल नामक आइटी कर्मी की सड़क हादसे में मौत को संदिग्ध करार देते हुए मृतक के परिजनों ने इसकी सीबीआइ जांच की मांग की है। परिजनों का दावा है कि अभिषेक की मौत हादसे में नहीं हुई, बल्कि साजिशन हत्या की गई है। परिजनों का तर्क है कि जिस रॉनी नामक दोस्त से अभिषेक मिलने गया था, उसका घर महज दो किलोमीटर की दूरी पर है। बावजूद इसके, उसे वहां से लौटने में एक घंटे का समय क्यों लगा। अगर हादसे में ही उसकी मौत हुई है तो सिर को छोड़कर शरीर के बाकी हिस्से में चोट के निशान क्यों नहीं हैं। उसके हाथ में घड़ी थी, दो मोबाइल फोन थे और चश्मा भी था, लेकिन उसमें खरोंच तक नहीं आईं। दुर्घटना हुई होती तो फोन-चश्मा का टूटना तय था। परिजनों ने पुलिस पर भी जांच में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि अभिषेक की मोटरसाइकिल दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद पुलिस को उसे जब्त करने में चार दिनों का वक्त लग गया। इतने में सबूत मिटाए भी जा सकते हैं। यही नहीं, फॉरेंसिक जांच आठ दिनों के बाद की गई। मृतक के कपड़ों की भी कोई जांच नहीं की गई। वहीं, हल्की धाराएं लगाकर हादसे के लिए जिम्मेदार चालक को छोड़ दिया गया। इसके अलावा अभिषेक के दोस्त रॉनी का पासपोर्ट लेकर पुलिस ने उसे शहर छोड़ने की इजाजत दे दी। अब वह बेंगलुरु जा चुका है और उसका मोबाइल फोन भी बंद है। अगर पुलिस ने सही से अपना काम किया होता तो अब तक सच्चाई सामने आ चुकी होती, इसीलिए वे अभिषेक की मौत की जांच सीबीआइ से कराना चाह रहे हैं। गौरतलब है कि न्यूटाउन निवासी अभिषेक मंडल बेंगलुरु में आइटी कंपनी में कार्यरत थे। दुर्गापूजा के समय वे अपने घर आए थे। सात अक्टूबर यानी महानवमी को वे अपने दोस्त रॉनी से मिलने गए थे, जो बेंगलुरू में उसके साथ ही काम करता है। वहां से अगले दिन विजयादशमी को घर लौटने के दौरान एक वाहन के धक्के से वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। रॉनी ने ही इसकी जानकारी परिजनों को दी। बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गत 13 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई थी।

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