जागरण संवाददाता, कोलकाता। महानगर के नयाबाद स्थित एक निजी कैंसर अस्पातल में ओवेरियन कैंसर से पीड़ित एक महिला को धरती के करिश्माई भगवान यानी चिकित्सकों ने नव पद्धति से उपचार कर उसकी जान बचा ली।

हालांकि पहले महिला ओवेरियन कैंसर से ग्रसित थी लेकिन सही तरीके से उपचार न होने की वजह से कैंसर का फैलाव होता गया और आहिस्ते-आहिस्ते पेट के कई हिस्सों में इसका फैलाव होने से चिकित्सकों के लिए इसे ऑपरेट करना आसान नहीं था। चिकित्सकों की मानें तो जब पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया तो उस दौरान वह कैंसर के चौथे चरण में थी। ऐसे में उसे बचाना खासा मुश्किल था लेकिन हम प्रेशराइज्ड इंट्रापेरिटोनियल एरोसोलिज्ड कीमोथेरेपी के जरिए आगे बढ़े और हमें सफलता भी मिली।

हावड़ा निवासी कमला आडवाणी (57) (परिवर्तित नाम) पेट की समस्या से परेशान थी और लगातार उनका पेट सूजता जा रहा था। वहीं चिकित्सकीय जांच के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि उनके अंडाशय में कैंसर है। इधर, इलाज तो शुरू हो गई लेकिन इलाज के लिए अपनाए गए तरीके बेमेल साबित होने से कैंसर का फैलाव होता गया।

आहिस्ते-आहिस्ते तकलीफ बढ़ने लगी तो आखिरकार मरीज को नयाबाद स्थित निजी कैंसर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पीआइपीएसी पद्धति से इलाज कर चिकित्सकों ने मरीज की जान बचा ली। चिकित्सक डॉ. सौमेन दास ने बताया कि जिस तरीके से हमने मरीज का इलाज किया उसे पीआइपीएसी विधि कहा जाता है। इस पद्धति में कीमोथेरेपी सीधे पेट के माध्यम से नेबुलाइजर से होती है और इस विधि के जरिए पीड़ित मरीज की जान बचाई जा सकती है। आगे उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में पहली बार इस विधि का इस्तेमाल किया गया है और खुशी की बात यह है कि हम इसमें कामयाब रहे।

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