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26 साल बाद मिठाई कारोबारी को मिला न्याय, कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद की सजा

Published: Wed, 09 Sep 2026 10:08 PM (IST)Updated: Wed, 09 Sep 2026 10:10 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 26 साल पुराने दही में मिलावट के मामले में कृष्णनगर के मिठाई कारोबारी भगीरथ घोष को ...और पढ़ें

कोलकाता हाईकोर्ट।

कोलकाता हाईकोर्ट।

HighLights

  1. कलकत्ता हाई कोर्ट ने 26 साल पुराने मामले में सजा रद्द की।

  2. नदिया के मिठाई कारोबारी भगीरथ घोष को मिली राहत।

  3. दही में फैट कम होने के आरोप से बरी हुए।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। 26 साल पुराने मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने नदिया जिले के कृष्णनगर के मिठाई कारोबारी भगीरथ घोष को राहत दी है। दही में फैट की मात्रा कम पाए जाने को मिलावट मानकर निचली अदालत ने उन्हें छह महीने की जेल और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। न्यायमूर्ति चैताली चट्टोपाध्याय (दास) ने अब वह सजा रद कर दी।

मामला 16 मई 1997 का है। कृष्णनगर के सब-डिविजनल फूड इंस्पेक्टर देवाशीष राय ने भगीरथ की मिठाई की दुकान का निरीक्षण किया था। उन्होंने दुकान से दही का नमूना लिया था। जांच के लिए इसे नदिया के पब्लिक एनालिस्ट के पास भेजा गया।

रिपोर्ट में दही में फैट की मात्रा कम बताई गई। इसी आधार पर मिलावट का मामला दर्ज हुआ। वर्ष 2000 में कृष्णनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने छह महीने की जेल और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। 2004 में सत्र अदालत ने भी सजा बरकरार रखी, जिसके बाद भगीरथ ने हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि नमूना लेने की प्रक्रिया भी स्पष्ट नहीं थी और कोई स्वतंत्र गवाह नहीं लिया गया। साथ ही, केवल फैट कम होने से दही को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक या खाने योग्य नहीं होने वाला नहीं कहा जा सकता। अदालत ने माना कि केवल पब्लिक एनालिस्ट की रिपोर्ट के आधार पर सजा दी गई थी। अदालत ने इसी आधार पर भगीरथ की याचिका मंजूर करते हुए निचली अदालत की सजा रद कर दी और उन्हें जमानत बांड से मुक्त कर दिया।