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माकपा को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका, सड़क किनारे बुकस्टॉल लगाने पर रोक

Published: Fri, 16 Oct 2026 07:02 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बनगांव में माकपा के बुकस्टॉल लगाने की अनुमति पर रोक लगा दी है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने माकपा बुकस्टॉल अनुमति पर लगाई रोक।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने माकपा बुकस्टॉल अनुमति पर लगाई रोक।

HighLights

  1. कलकत्ता हाई कोर्ट ने माकपा बुकस्टाल अनुमति पर लगाई रोक।

  2. बिना अनुमति सड़क किनारे स्टाल लगाने की इजाजत नहीं।

  3. मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को निर्धारित की गई।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव में माकपा के बुकस्टॉल लगाने की अनुमति पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी घुगे और न्यायमूर्ति शब्बार रशीदी की विशेष खंडपीठ ने शुक्रवार को एकल पीठ के उस आदेश पर स्थगनादेश जारी किया, जिसमें बुकस्टॉल लगाने की अनुमति दी गई थी।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि टेबल और छाता लगाकर भी स्टाल नहीं खोला जा सकेगा। मामले में सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 जनवरी को निर्धारित की गई है।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने पिछले गुरुवार को माकपा को बुकस्टॉल लगाने की अनुमति दी थी। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ में अपील की।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने माकपा के वकील शमीम अहमद से पूछा कि क्या स्टाल लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति मांगी गई थी। इस पर वकील ने दावा किया कि लोक निर्माण विभाग और राजमार्ग प्राधिकरण के पास आवेदन किया गया था तथा पुलिस को भी इसकी जानकारी दी गई थी।

अदालत ने कहा, कानून की नजर में सभी समान

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सड़क किनारे बिना अनुमति किसी को भी स्टाल लगाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे सभी स्टाल हटाए जाएं और कानून की नजर में समानता सुनिश्चित की जाए।

राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता बिल्वदल भट्टाचार्य ने भी बिना अनुमति बुकस्टॉल लगाने पर सवाल उठाया।माकपा के वकील ने दुर्गापूजा का हवाला देते हुए सीमित व्यवस्था में स्टाल लगाने की अनुमति मांगी। उन्होंने कहा कि न तो माइक का इस्तेमाल होगा और न ही अस्थायी ढांचा बनाया जाएगा।

केवल टेबल और छाता लगाकर पार्टी कार्यालय के सामने किताबें बेचने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया। हालांकि, खंडपीठ ने इस व्यवस्था की भी अनुमति नहीं दी और एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी।