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जब ऑनलाइन मिल रहे सेक्स टॉयज, तो इंपोर्ट पर 'अश्लीलता' का ब्रेक क्यों? कस्टम विभाग पर भड़का कलकत्ता हाई कोर्ट

Published: Thu, 17 Sep 2026 08:23 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सेक्स टॉय के आयात पर सीमा शुल्क विभाग द्वारा लगाई गई रोक पर सवाल उठाया है, ...और पढ़ें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सेक्स टॉय आयात प्रतिबंध पर सीमा शुल्क विभाग से मांगा जवाब

कलकत्ता हाई कोर्ट ने सेक्स टॉय आयात प्रतिबंध पर सीमा शुल्क विभाग से मांगा जवाब

HighLights

  1. कलकत्ता हाई कोर्ट ने सेक्स टॉय आयात प्रतिबंध पर सवाल उठाया।

  2. अदालत ने सीमा शुल्क विभाग से कानूनी आधार स्पष्ट करने को कहा।

  3. व्यक्तिगत नैतिकता पर व्यापारिक अधिकारों को प्रभावित करने पर हस्तक्षेप होगा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। भारतीय सीमा शुल्क कानून के तहत सेक्स ट्वाय के आयात पर रोक वास्तव में सीमा शुल्क विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है या नहीं, इसपर कलकत्ता हाई कोर्ट ने सवाल उठाया है।

न्यायमूर्ति स्मिता दास दे की एकल पीठ ने कहा कि यदि कोई प्राधिकरण केवल व्यक्तिगत नैतिकता के आधार पर किसी वस्तु को ‘अश्लील’ बताकर प्रतिबंधित करता है और इससे किसी नागरिक के कारोबारी अधिकार प्रभावित होते हैं, तो अदालत को मामले में हस्तक्षेप करना होगा।

अदालत ने सीमा शुल्क विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किस कानूनी प्रावधान के तहत सेक्स ट्वाय के आयात पर रोक लगाई गई है और उसे किस तरह लागू किया गया।

मामला एक कंपनी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता कंपनी का दावा है कि ‘बाडी मसाजर’ या सेक्स ट्वाय को प्रतिबंधित वस्तु नहीं माना जा सकता। कंपनी के अनुसार, 1962 के सीमा शुल्क कानून में इस तरह के सामान के आयात पर सीधे रोक लगाने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

इसके अलावा ये उत्पाद देश के बाजार के साथ-साथ विभिन्न आनलाइन बिक्री मंचों पर भी आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे में इनके आयात पर रोक लगाने से कारोबार प्रभावित होगा।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि किसी वस्तु को केवल नैतिकता के व्यक्तिगत नजरिये से ‘अश्लील’ मानकर उसके आयात पर रोक नहीं लगाई जा सकती। इससे किसी व्यक्ति के कारोबार करने के अधिकार में भी हस्तक्षेप होता है।

दूसरी ओर सीमा शुल्क विभाग ने याचिका की स्वीकार्यता पर ही सवाल उठाया था। विभाग की ओर से कहा गया था कि सीमा शुल्क कानून की धारा 128 के तहत याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष आवेदन करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सीधे हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि मामले में केवल तथ्यों का विवाद नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण कानूनी सवाल भी जुड़े हैं। अदालत ने सीमा शुल्क विभाग को दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष हलफनामे के रूप में दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई नौ अक्टूबर को होगी।