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जज ने छोड़ा पत्थर कारोबारी टुल्लू मंडल का मामला, अब मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे कौन सी पीठ करेगी सुनवाई

Published: Fri, 25 Sep 2026 07:20 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने बीरभूम के पत्थर कारोबारी टुल्लू मंडल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका से खुद को अलग कर लिया है।

टुल्लू मंडल मामले से कलकत्ता हाई कोर्ट के जज ने खुद को किया अलग

टुल्लू मंडल मामले से कलकत्ता हाई कोर्ट के जज ने खुद को किया अलग

HighLights

  1. न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने टुल्लू मंडल मामले से खुद को अलग किया।

  2. मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी घुगे अब नई पीठ का फैसला करेंगे।

  3. पत्थर कारोबारी टुल्लू मंडल अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता । बीरभूम के पत्थर कारोबारी टुल्लू मंडल के खिलाफ दर्ज एफआइआर को चुनौती देने वाली याचिका से कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य अलग हो गए हैं। अब इस मामले की सुनवाई कौन सी पीठ करेगी, इसका फैसला मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी घुगे करेंगे।

टुल्लू ने गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए रक्षाकवच की मांग की थी। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ ने उनकी याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्देश के अनुसार पेश होने को कहा था। इसके बाद टुल्लू ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए फिर हाई कोर्ट का रुख किया था।

एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पहले न्यायमूर्ति कौशिक चंद की पीठ में गई थी। उन्होंने यह कहते हुए सुनवाई से इन्कार किया कि उसी मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ में चल रही है।

इसके बाद मामला फिर न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ में पहुंचा। उन्होंने कहा कि जिस मामले का वह पहले ही निपटारा कर चुके हैं, उसकी दोबारा सुनवाई नहीं करेंगे। अब याचिका मुख्य न्यायाधीश के पास भेजी गई है।

टुल्लू अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर

29 और 30 जुलाई को मोहम्मदबाजार थाना क्षेत्र के देउचा गांव में टुल्लू के रिश्तेदार मिनार मंडल के घर से 28.50 करोड़ रुपये नकद और 15 किलो सोना बरामद किया गया था। इसके बाद से पुलिस टुल्लू की तलाश कर रही है।

जांच अधिकारियों का दावा है कि वह विदेश भाग गया है। इसी बीच टुल्लू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। सिउड़ी के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने उसे पेश होने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट भी स्पष्ट कर चुका है कि उन्हें निचली अदालत के निर्देश के अनुसार पेश होना होगा।