जागरण संवाददाता, कोलकाता : आमतौर पर शादी के आमंत्रण पत्र का पहला वाक्य इष्ट देव की स्तुति से संबद्ध होता है लेकिन इसकी जगह नो सीएए-नो एनआरसी का स्लोगन लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। देश भर में जारी संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का विरोध मेनू कार्ड से होते हुए अब यह शादी के कार्ड तक पहुंच गया है। दरअसल पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के एक व्यक्ति ने शादी के आमंत्रण पत्र के माध्यम से सीएए-एनआरसी का विरोध किया है। जिले के केशवपुर निवासी अलीफ मोहम्मद ने बताया कि मेरी शादी ऐसे समय में हो रहा जब पूरा देश सीएए-एनआरसी की आग में जल रहा है। ऐसे में भारतीय नागरिक होने के नाते इस असंवैधानिक नीति के खिलाफ विरोध जताना हमारा कर्तव्य है। इसलिए मैने शादी के आमंत्रण पत्र में नो एनआरसी-नो सीएए लिखा है। इसके माध्यम से मेरे जितने भी सगे संबंधी है उनके पास यह मैसेज पहुंच जाएगा। अलीफ के माता-पिता ने इस कदम का तहे दिल से स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि मेरे बेटे ने अच्छा काम किया है। लोगों को पता होनी चाहिए कि देश को धर्म के नाम पर विभाजित करने की राजनीति की जा रही है। देश में रहने वाले सभी भारतीय हैं। ऐसे में उन्हें नए सिरे से नागरिकता देने का कोई औचित्य नहीं है। बता दें कि संसद के दोनों सदनों से होते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद कानून बनने बनने के साथ ही देश भर में इसका विरोध शुरू हो गया था। विपक्षी दल, छात्र संगठन और आम नागरिकों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल रखा हैं। 

Posted By: Preeti jha

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