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बंगाल: बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन के बिहार से आएगा नर बाघ, 3 महीने में आएंगी 2 और बाघिन

Published: Sat, 03 Oct 2026 11:17 PM (IST)

बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन के लिए बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से एक नर बाघ लाया जाएगा।

बक्सा की ‘वन रानी’ के लिए बिहार से ही आएगा ‘राजा’। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बक्सा की ‘वन रानी’ के लिए बिहार से ही आएगा ‘राजा’। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बक्सा आएगा नर बाघ।

  2. बक्सा में अगले तीन माह में दो और बाघिनें लाई जाएंगी।

  3. छोड़ी गई बाघिन की नाइट-विजन ड्रोन कैमरों से निगरानी जारी।

जागरण संवाददाता, अलीपुरद्वार। बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन के लिए अब ‘राजा’ लाने की तैयारी शुरू हो गई है।

बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से ही अगले 20 से 22 दिनों के भीतर एक नर बाघ को बक्सा लाया जाएगा। इसके बाद अगले तीन महीनों के भीतर दो और बाघिनों को यहां लाने की योजना है। इस तरह बक्सा में बाघों की संख्या बढ़ाकर उनके प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की कवायद तेज हो गई है।

इस बाघिन को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में वन में छोड़ा गया है।

सेंट्रल वाइल्डलाइफ बोर्ड के सदस्य सौमित्र दासगुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए), वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और सेंट्रल वाइल्डलाइफ बोर्ड के बीच हुई संयुक्त चर्चा में बक्सा में अगले तीन महीनों में एक नर बाघ और दो बाघिनों को लाने का निर्णय लिया गया है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में उपयुक्त नर बाघों की पहचान भी कर ली गई है।

इधर, जिस बाघिन को बक्सा में छोड़ा गया है वह शनिवार को 2.2 हेक्टेयर क्षेत्र में ही रही। वन अधिकारियों के अनुसार बिहार से यात्रा की थकान और लगातार दो बार बेहोशी की दवा के कारण फिलहाल वह कुछ कमजोर है। इसी वजह से उसने एनक्लोजर में मौजूद चीतल की ओर भी कोई विशेष ध्यान नहीं दिया।

चीतल को उसके खाने के लिए रखा गया है। वन अधिकारियों का कहना है कि नई जगह के वातावरण के साथ पूरी तरह अभ्यस्त होने में बाघिन को कुछ समय लग सकता है। वन अधिकारी उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

नाइट-विजन ड्रोन कैमरों से नजर

सौमित्र दासगुप्ता ने कहा कि बाघिन को एनक्लोजर से बाहर निकालने की कोशिश नहीं की जाएगी। वह अपनी इच्छा से प्राकृतिक वातावरण में जाएगी।

फिलहाल उसकी हर गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए तीन नाइट-विजन ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही रेडियो कालर से मिलने वाले सिग्नल की 24 घंटे निगरानी हो रही है।

वन अधिकारी और वन्यजीव चिकित्सकों की टीम भी लगातार उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बक्सा टाइगर रिजर्व में लंबे समय से बाघों की संख्या बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है। इसी क्रम में हाल में बिहार से एक बाघिन को लाकर बक्सा में छोड़ा गया है। अब उसके लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से नर बाघ लाने की तैयारी है।