राज्य ब्यूरो, कोलकाता : सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का मिशन न केवल अंतरराष्ट्रीय सीमा की रखवाली व उसके जरिए होने वाले अपराधों को रोकना है, बल्कि उन लोगों का दिल भी जीतना हैं जिनके साथ सीमा पर उनका चोली दामन का साथ है। मुश्किल समय में सीमा सुरक्षा बल और सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोग हमेशा एक दूसरे की मदद करते हैं। 

इसी मिशन को चरितार्थ करते हुए सीमा सुरक्षा बल बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास दो अलग-अलग घटनाओं में 4 लोगों की जान बचाने में सहायक सिद्ध हुए हैं। इन दोनों घटनाओं में बीएसएफ के बहादुर जवानों ने राष्ट्र की सर्वोपरि सेवा के साथ मानवता के प्रति अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया। 

तेज बहाव के कारण अचानक नाव पलट गई

पहली घटना सोमवार दोपहर की है जब मछली पकड़ने के उद्देश्य से गंगा नदी के बीच में तीन नागरिक, सीजीआइ शीट की बनी नाव पर जा रहे थे, तभी पानी के तेज बहाव के कारण अचानक उनकी नाव पलट गई। बीएसएफ के जवानों को मछुआरों की 'बचाओ बचाओ' चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। जिसके बाद बॉर्डर आउट पोस्ट बामनाबाद में तैनात 117वीं बटालियन के एसआइ अशोक कुमार एक अधीनस्थ जवान के साथ तुरंत इंजन फिटेड कंट्री बोट से डूबते हुए लोगों को बचाने पहुंचे। 

रणबांकुरे ने जान पर खेलकर बचाई है जान

घटनास्थल पर पहुंचने के तुरंत बाद बीएसएफ के रणबांकुरे ने अपनी जान पर खेलकर पानी में कूद कर डूबते हुए तीनों व्यक्तियों को उठाकर वोट में डाला और उनको किनारे तक लेकर आ गए। यहां तीनों को तुरंत प्राथमिक चिकित्सा दी गई और बाद में उन्हें सरकारी अस्पताल रानीनगर पहुंचाया गया। बीएसएफ की तत्परता के कारण तीनों नागरिकों की जान बच गई। बचाए गए व्यक्तियों के नाम सिराजुल (55), सहादुल शेख (60) और बिलुक मोल्ला (57) हैं। तीनों मुर्शिदाबाद जिले के रहने वाले हैं। 

सरकारी गाड़ी से सरकारी अस्पताल में पहुंचाया

एक अन्य घटना में सोमवार को मुर्शिदाबाद के ही सीमावर्ती ग्राम- चर लवांगोला निवासी 59 वर्षीय मोतीहार रहमान बीओपी कानूनगोला, 35 बटालियन के रजिस्टर पर एंट्री करने के बाद चर क्षेत्र में पशुओं के लिए घास काटने गए। वापस आते समय उन्हें एक सांप ने काट लिया। दोपहर लगभग 1:30 बजे इसकी सूचना मिलते ही कंपनी कमांडर अभिजीत सेठ ने तुरंत उक्त व्यक्ति को चर क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए स्पीड बोट भेजी और उन्हें सरकारी गाड़ी देकर सरकारी अस्पताल, कनपुकुर पहुंचाया। 

समय पर मदद न मिलती तो जा सकती थी जान

साथ ही सर्प विष रोधी दवाई की व्यवस्था के लिए ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर से संपर्क किया। आगे मरीज को बेहतर इलाज के लिए बेरहामपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहुंचाया गया। मरीज की हालत फिलहाल स्थिर है। इधर, बीएसएफ के इस कार्य पर स्थानीय लोगों ने बहुत प्रसन्नता व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर बीएसएफ के रणबांकुरे समय पर उनकी मदद नहीं करते तो चारों भारतीय नागरिकों की जानें जा सकती थी।

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