राज्य ब्यूरो, कोलकाता : बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा इलाके में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को चकमा देने के लिए तस्कर हमेशा नया से नया तरीका अपनाते हैं, लेकिन जब कोई चाल कामयाब नहीं हुई तो उन्होंने तस्करी के लिए ऐसी घिनौनी चाल पर उतर आए जिसे सुनकर व देखकर आप सिहर जाएंगे। तस्करों ने मरे हुए पशुओं के शरीर के अंदर मछली के अंडे (फिश बॉल) छिपाकर नदी के रास्ते बांग्लादेश में तस्करी का प्रयास किया लेकिन बीएसएफ के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के सजग जवानों ने इसे भी पकड़ लिया। यह घटना उत्तर 24 परगना जिले के हासनाबाद क्षेत्र में गोलपाड़ा सीमा चौकी इलाके की है, जहां तैनात 85वीं बटालियन के जवानों ने शुक्रवार शाम में इसे नाकाम करते हुए तस्करों की इस करतूत का भंडाफोड़ किया।

बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि पहली बार इस तरह तस्करी का घिनौना तरीका सामने आया है। दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के डीआइजी व वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी सुरजीत सिंह गुलेरिया ने बताया कि तस्करों ने दो मरे हुए पशुओं के शरीर के अंदर 12 फिशबॉल (मछली के अंडों से भरे पॉलिथीन के पैकेट) डालकर बाहर से सिलाई कर उसे इच्छामती नदी में डाल दिया था ताकि ज्वार- भाटा के कारण यह जानवर पानी में बहकर बांग्लादेश चले जाएंगे तथा इन्हें बांग्लादेशी तस्कर मृत पशुओं के शरीर की सिलाई खोलकर फिश बॉल को निकाल लेंगे। लेकिन, हमारे सीमा सुरक्षा बल के निगाहबान तथा मुस्तैद नजरों से तस्करों की यह कुटिल तथा घृणित चाल भी कामयाब नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 500 मीटर पहले ही भारत के इलाके में हमारे जवानों ने उसे पकड़कर जब्त कर लिया। जब्त फिश बॉल का अनुमानित मूल्य ₹96000 है।

गुलेरिया ने बताया कि देखने वालों को यह लग रहा था कि 2 मृत पशु पानी में बह रहे हैं, किसी को यह अंदाजा नहीं था कि इनके शरीर के अंदर मछली के अंडों को छिपा कर तस्करी की जा रही है। लेकिन 85वीं बटालियन के जवान बॉर्डर पर अपनी ड्यूटी बड़ी मुस्तैदी से कर रहे हैं। नदी में बोट से पेट्रोलिंग के दौरान नजर पड़ने पर‌ जवानों ने दोनों मृत पशुओं को अपने कब्जे में कर इसे नदी किनारे ले आए।‌ यहां सिलाई खोलने पर उसमें से 12 फिशबॉल बरामद किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर अनुराग मणि के नेतृत्व में जवानों ने हासनाबाद सीमा चौकी से जीरो पॉइंट तक के इलाके पर जबरदस्त तरीके से तस्करी की वारदातों पर अंकुश लगा रखा है। यूनिट कमान अधिकारी ने यह प्रतिबद्धता जताई है कि उनके इलाके से तस्करों की किसी भी कुटिल चाल को कामयाब नहीं होने देंगे।

बांग्लादेश में मिलता है दोगुना दाम

डीआइजी गुलेरिया ने बताया कि बरसात के मौसम शुरू होने से पहले दक्षिण बंगाल सीमांत इलाके में उत्तर 24 परगना जिले से मछली के अंडों/बीज की तस्करी पिछले कई वर्षों से होती आई है। यह अंडे स्थानीय इलाकों में चेन्नई, केरल या उड़ीसा से सप्लाई आती है। इसमें भारत में मछली के 1 अंडे की कीमत लगभग 75 पैसे से लेकर 1 रुपये तक होती है। लेकिन जब यह बांग्लादेश पहुंच जाती है तो इसकी कीमत दोगुनी हो जाती है। उन्होंने बताया कि मछली के अंडों को पॉलिथीन के पैकेट में डालकर बांध देते हैं। ‌

इसे स्थानीय भाषा में फिश बॉल कहते हैं। 1 फिश बॉल की कीमत भारत में लगभग 8 से ₹10000 तथा बांग्लादेश में भारतीय करेंसी के हिसाब से 16 से ₹20000 तक हो जाती है। गुलेरिया ने बताया कि बॉर्डर इलाके में रहने वाले तस्कर खराब मौसम या ग्राउंड का इस्तेमाल करते हुए जहां सीमा सुरक्षा बल के जवान से कोई इलाका ओझल हो जाता है वहां से फिशबॉल की तस्करी का प्रयास करते हैं। विगत दिनों जब भी तस्करों ने मछली के अंडों की तस्करी का प्रयास किया बीएसएफ के मुस्तैद जवानों द्वारा इसे पकड़ लिया गया। जब तस्करों की कोई चाल कामयाब नहीं हुई तो उन्होंने यह घिनौना तरीका अपनाया लेकिन बीएसएफ जवानों ने इसे भी नाकाम कर दिया।

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