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कोलकाता में 'खराब मीट' विवाद वाले इनफ्लुएंसर को बीजेपी से मिले थे 2.5 लाख रुपये, चुनाव खर्च के डेटा में खुलासा

Published: Sat, 26 Sep 2026 11:06 AM (IST)

चुनाव आयोग के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को प्रचार के लिए मोटी रकम चुकाई।

चुनाव खर्च के डेटा में खुलासा।

चुनाव खर्च के डेटा में खुलासा।

HighLights

  1. भाजपा ने पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार हेतु इन्फ्लुएंसर्स को पैसे दिए।

  2. चुनाव आयोग के आंकड़ों ने इस बड़े भुगतान का खुलासा किया।

  3. भाजपा ने कहा, यह पार्टी फंड से वैध खर्च था।

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य के कई जाने-माने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भाजपा की तरफ से पैसे दिए जाने का बड़ा मामला सामने आया है। चुनाव आयोग (EC) के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि भाजपा ने चुनाव प्रचार के लिए इन इन्फ्लुएंसर्स की मदद ली थी, जिसके बदले उन्हें मोटी रकम चुकाई गई।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने पश्चिम बंगाल चुनाव में कुल 286.99 करोड़ रुपये खर्च किए, जो चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में उसके कुल चुनाव खर्च का 54% हिस्सा है।

सोशल मीडिया पर पकड़ का सौदा का खुलासा

आंकड़ों के अनुसार राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्मों के जरिए इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क किया गया था। भुगतान का आधार उनकी सोशल मीडिया रीच थी। मुर्शिदाबाद में बॉर्डर सिक्योरिटी और कोलकाता में आरजी कर जैसे मुद्दों पर खास फोकस करने के निर्देश भी दिए गए थे।

इस लिस्ट में दो बड़े नाम, जिनके नाम रहा विवाद

बता दें कि इस पूरी सूची में दो बड़े नाम ऐसे हैं, जो कि चर्चा में है। पूरे मामले को ऐसे समझिए कि इस सूची के अनुसार भाजपा के तरफ से बंगाली अभिनेता और इन्फ्लुएंसर्स सयाक चक्रवर्ती को 2.5 लाख रुपये मिले।

अब यह नाम चर्चा में इसलिए है, क्योंकि जनवरी में कोलकाता के पार्क स्ट्रीट के मशहूर रेस्तरां 'ओलिपब' में मटन स्टेक की जगह बीफ परोसे जाने का विवाद इन्होंने ही उठाया था, जो बाद में बड़ा राजनीतिक और सांप्रदायिक मुद्दा भी बन गया था।

शमिक अधिकारी सूची का दूसरा बड़ा नाम

इस सूची में दूसरा बड़ा नाम शमिक अधिकारी का रहा, जिसे 13 लाख रुपये मिले। उन्होंने आरजी कर मामले के बाद तृणमूल सरकार पर निशाना साधते हुए 'बटन' नाम से एक वीडियो बनाया था, जिसे भाजपा नेताओं ने भी शेयर किया था। फरवरी में शमिक को रेप और गलत तरीके से बंधक बनाने के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।

'ग्रे एरिया' और विवादों की असली वजह क्या है?

गौरतलब है कि इस पूरे मामले पर कानूनी और कम्युनिकेटिव एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह का कंटेंट एक 'ग्रे एरिया' में आता है। जानकारों का कहना है कि इस तरह के पेड प्रमोशन पर डिस्क्लेमर होना चाहिए, वरना यह दर्शकों को भ्रमित करने जैसा है।

टीएमसी, सीपीएम और सिविल सोसायटी के लोगों ने इस खुलासे पर कड़ा विरोध जताया है। टीएमसी आईटी सेल की प्रमुख उपासना चौधरी ने सयाक चक्रवर्ती पर तंज कसते हुए पुराना वीडियो शेयर कर पूछा कि क्या उन्होंने 2.5 लाख रुपये हजम कर लिए हैं।

भाजपा का दो टूक जवाब

हालांकि दूसरी ओर इस पूरे मामले में भाजपा की प्रतिक्रिय भी सामने आई है। भाजपा ने इसे पूरी तरह सही ठहराया है। पश्चिम बंगाल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने बेबाक अंदाज में कहा कि 'हाँ, हमने इन्फ्लुएंसर्स को पैसे दिए हैं। तो क्या हुआ?

उन्होंने कहा कि हम ऐसा दोबारा करेंगे। हमने पूरी तरह नियमों के दायरे में रहकर काम किया है। यह सरकारी पैसा नहीं था, पार्टी फंड से दिया गया है। एक-एक पाई का हिसाब है।