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बंगाल के बीरभूम में 17 साल बाद अपने गांव लौटे 40 विस्थापित परिवार, TMC पर घर तोड़ने और बेदखल करने का आरोप

Published: Mon, 28 Sep 2026 09:25 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बीरभूम के नानूर स्थित पापुड़ी गांव के करीब 40 विस्थापित परिवार 17 साल बाद अपने घर लौटे।

भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बीरभूम में 17 साल बाद घर लौटे विस्थापित परिवार (फोटो- सोशल मीडिया)

भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बीरभूम में 17 साल बाद घर लौटे विस्थापित परिवार (फोटो- सोशल मीडिया)

HighLights

  1. कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर 40 परिवार घर लौटे।

  2. 2009 में राजनीतिक संघर्ष के कारण हुए थे विस्थापित।

  3. टीएमसी पर घर तोड़ने का आरोप, विधायक ने नकारा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता । कलकत्ता हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बीरभूम के नानूर के पापुड़ी गांव से लंबे समय से विस्थापित करीब 40 परिवार 17 वर्ष बाद सोमवार को अपने गांव पहुंचे।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ के इस महीने की नौ तारीख के आदेश के बाद नानूर थाने की बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उन्हें गांव में प्रवेश कराया गया। लौटे परिवारों ने अपने घरों को देखा और स्थानीय लोगों से बातचीत की।

परिवारों के अनुसार, 2009 में माकपा और तृणमूल के राजनीतिक संघर्ष के बाद उन्हें पापुड़ी छोड़ना पड़ा था। उनका दावा है कि 2011 और 2016 में पुलिस की मदद से लौटने के बावजूद उन्हें पानी और दुकानों जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिलीं, जिसके कारण दोबारा गांव छोड़ना पड़ा।

परिवारों ने 2021 की चुनाव बाद हिंसा के दौरान जेसीबी से उनके पक्के मकान तोड़े जाने का भी आरोप लगाया है। विस्थापित परिवारों ने ऋतब्रत समर्थक तृणमूल विधायक काजल शेख पर आरोप लगाए हैं।

काजल शेख ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि लौटे लोग हत्या के मामलों में आरोपित हैं और माकपा से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि उनके पिता और दो भाइयों की हत्या तथा सिराज शेख की हत्या के मामलों में भी ये लोग आरोपित हैं और गांव के लोग उन्हें वापस नहीं चाहते।

गांव लौटे परिवारों का कहना है कि उनके पुराने मकान पूरी तरह टूट चुके हैं और अब वहां केवल खंडहर व खाली जमीन बची है।