कोलकाता, जेएनएन। कोलकाता: भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ लिया। उन्होंने तृणमूल से इस्तीफा देने का एलान किया और कहा कि वह अब किसी भी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं हैं। 

देश के प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी ने ट्वीट कर तृणमूल के सभी आधिकारिक एवं राजनीतिक पदों से त्यागपत्र देने की घोषणा की। भूटिया 2014 लोकसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि भूटिया भाजपा के साथ अपना राजनीतिक करियर जारी रख सकते हैं।

उन्होंने कहा, मैं  आधिकारिक रूप से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस पार्टी की सदस्यता, सभी आधिकारिक और राजनीतिक पद से इस्तीफा देता हूं। मैं अब किसी भी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा नहीं हूं। वर्ष 2014 में, तृणमूल ने भूटिया को दार्जिलिंग लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें इस सीट से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्हें वर्ष 2016 में भी सिलीगुड़ी विधानसभा क्षेत्र से हार का सामना करना पड़ा था। 

भूटिया ने हालांकि तृणमूल से अपने सभी संबंध तोड़ने के पीछे कारण नहीं बताया है। कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश के बावजूद उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो सका। तृणमूल ने भी उनके इस्तीफा पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। तृणमूल के महासचिव और शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, मैं इस पर कुछ नहीं कह रहा हूं। अपने दो दशक लंबे कैरियर में भूटिया 12 वर्षो तक देश की राष्ट्रीय टीम की कप्तानी की। उन्होंने ब्यूरी एफसी की तरफ से इंग्लिश प्रोफेशनल लीग में भी हिस्सा लिया था। भूटिया भारत के स्टार फुटबॉलर रहे हैं। उन्होंने 2011 में फुटबॉल से संन्यास लिया था। भूटिया ने 104 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 40 गोल किए हैं।

भूटिया एक सेवानिवृत्त भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी हैं जो स्ट्राइकर के रूप में खेलते थे। भूटिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फुटबॉल का मशालदार माना जाता है। फुटबॉल में उनकी शूटिंग कौशल की वजह से उन्हें अक्सर सिक्किमी स्निपर नाम दिया जाता है। सुप्रसिद्ध भारतीय खिलाड़ी आइ एम विजयन ने भूटिया को “भारतीय फुटबॉल के लिए भगवान का उपहार” बताया था।

भूटिया का 2004 में विवाह हुआ था और 2014 में तलाक हो गया। भूटिया ने सबसे पहले आई-लीग फुटबॉल टीम ईस्ट बंगाल क्लब में अपना कैरियर शुरू किया जब वे 1999 में इंग्लिश क्लब बरी में शामिल हुए, वह यूरोपीय क्लब के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करने वाले पहले भारतीय फुटबॉल खिलाड़ी बने और मोहम्मद सलीम के बाद यूरोप में पेशेवर रूप से खेलने वाले खिलाड़ी बने। बाद में मलेशियाई फुटबॉल क्लब पेराक एफए के लिए खेले वो भी उधार पे. इस के साथ ही वो जेसीटी मिल्स के लिए खेले।

भूटिया के अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल सम्मान में नेहरू कप, एलजी कप, एसएएफएफ चैम्पियनशिप तीन बार और एएफसी चैलेंज कप जीतना शामिल है।वह भारत के सबसे ज्यादा कैप पाने वाले खिलाड़ी हैं, उनके नाम पर 104 अंतर्राष्ट्रीय कैप हैं और नेहरू कप 2009 में उन्होंने अपनी 100 वीं अंतर्राष्ट्रीय कैप प्राप्त की। 

इधर, सूत्रों के हवाले से खबर है कि वे भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं। भाजपा ने पहले ही यह प्रस्ताव भेजा था। भूटिया के गृहराज्य सिक्किम में भाजपा एसडीएफ के साथ मिलकर सरकार चला रही है। भूटिया के तृणमूल छोड़ने के बाद केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजु ने लिखा है कि भूटिया का तृणमूल छोड़ना प्रत्याशित था इसके साथ ही उन्होंने भूटिया के भावी भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दी है।

तृणमूल सभ्य लोगों की पार्टी नहीं : भाजपा 

भूटिया के पार्टी छोड़ने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने कहा कि तृणमूल सभ्य लोगों की पार्टी नहीं है बाइचुंग इतने दिनों तक तृणमूल में कैसे टिके रहे यह आश्चर्य का विषय है। राहुल ने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस में भूटिया जैसे लोगों की जगह नहीं है, गणतंत्र विहीन ऐसे दल में जहां कोई नीति, सिद्धांत ही नहीं है वहां रहने का कोई मतलब नहीं बनता। इससे स्पष्ट है कि तृणमूल में टूट का सिलसिला शुरू हो गया है और बाइचुंग भूटिया का पार्टी छोड़ना इसका प्रमाण है।

Posted By: Preeti jha

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