राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल की हाई प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के बाद अब सबकी निगाहें चुनाव परिणाम पर टिकीं है। आज सुबह से वोटों की गिनती भी जारी है और अगले कुछ घंटे में तस्वीर साफ हो जाएगी कि आखिर कौन बाजी मारता है। यहां के चुनावी अखाड़े में किस्मत आजमा रहीं राज्य की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए यह उपचुनाव बेहद ही अहम है क्योंकि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें यहां से हर हाल में जीतना होगा।

ममता के लिए आज बहुत ही बड़ा दिन है। ममता के लिए यह परिणाम काफी अहमियत रखता है। इस चुनाव के नतीजे का ममता के राजनीतिक भविष्य पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। दरअसल, ममता ने इस साल की शुरुआत में हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी परंपरागत सीट भवानीपुर की बजाय नंदीग्राम से चुनाव लड़ी थीं, लेकिन भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से करीबी मुकाबले में हार गई थीं। नंदीग्राम के चुनाव परिणाम को ममता कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती भी दी है और यह मामला अभी अदालत में लंबित है। ममता बनर्जी ने अधिकारी के चुनाव को तीन आधारों पर शून्य घोषित करने की मांग की है- भ्रष्ट आचरण, धर्म के आधार पर वोट मांगना और बूथ पर कब्जा करना।उन्होंने दोबारा मतगणना की उनकी याचिका को खारिज करने के चुनाव आयोग के फैसले पर भी सवाल उठाया है।

टीएमसी- भाजपा दोनों कर रही जीत के दावे

इधर, टीएमसी के साथ राज्य में मुख्य विपक्षी भाजपा दोनों दल भवानीपुर से अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि ममता को यहां 50 हज़ार वोटों से जीत मिलेगी। उधर, भाजपा भी मैदान मारने का दावा कर रही है। भाजपा ने ममता के खिलाफ प्रियंका टिबड़ेवाल को मैदान में उतारा है। पिछले एक महीने में लगभग हर दिन ममता बनर्जी के लिए प्रचार करने वाले कैबिनेट मंत्री और टीएमसी के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने कहा, हमें पूरा विश्वास है कि ममता दीदी 50,000 से अधिक वोटों से जीतेंगी।

उधर, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, भवानीपुर में भाजपा बहुत अच्छी टक्कर देगी। उन्होंने पार्टी की जीत की उम्मीद जताई। साथ ही कहा कि अगर चुनाव परिणाम के बाद कोई हिंसा होती है तो राज्य सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी, नहीं तो सीबीआइ जांच के लिए है। 

Edited By: Priti Jha