विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

तेल-रासायनिक आपदा से निपटने की तैयारी परखेगा बंगाल, 21 अगस्त को पांच जिलों में मॉक ड्रिल

Published: Thu, 20 Aug 2026 02:00 AM (IST)Updated: Thu, 20 Aug 2026 04:47 AM (IST)

बंगाल सरकार 21 अगस्त को तेल और रासायनिक आपदा से निपटने की तैयारियों का राज्यस्तरीय मॉक अभ्यास करेगी।

आपदा से निपटने की तैयारी परखेगा बंगाल। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आपदा से निपटने की तैयारी परखेगा बंगाल। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. 21 अगस्त को तेल-रासायनिक आपदा पर राज्यस्तरीय मॉक ड्रिल।

  2. दो बड़े अग्निकांडों से सबक लेकर सरकार ने उठाया कदम।

  3. पांच जिलों के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों में होगा अभ्यास।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के होटलों में लगातार हुए दो बड़े अग्निकांड की घटनाओं में 18 लोगों की मौत से राज्य सरकार चिंतित है। इन घटनाओं से सबक लेते हुए तेल एवं रासायनिक आपदा की स्थिति में राज्य की तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखने के लिए बंगाल सरकार का आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग 21 अगस्त को राज्यस्तरीय मॉक अभ्यास आयोजित करेगा।

निर्धारित कार्यक्रम के तहत राज्य के पांच जिलों में स्थित प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अभ्यास के लिए चुना गया है। इसमें संबंधित जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन तंत्र और औद्योगिक इकाइयों की आपात स्थिति से निपटने की क्षमता को परखा जाएगा।

राज्य सचिवालय नवान्न की ओर से बुधवार को एक बयान में बताया गया कि राज्यस्तरीय माक अभ्यास के लिए नदिया जिले में इंडियन आयल (आइओसीएल) के एलपीजी बाटलिंग प्लांट, पश्चिम बर्द्धमान में सेल के दुर्गापुर स्टील प्लांट, पूर्व बर्द्धमान में मैट्रिक्स फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड, मालदा में आईओसीएल के एलपीजी बाटलिंग प्लांट तथा दक्षिण 24 परगना में बीपीसीएल प्रतिष्ठान को शामिल किया गया है।

अभ्यास के दौरान तेल और रासायनिक पदार्थों से जुड़ी संभावित दुर्घटनाओं की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य, आपात प्रतिक्रिया, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और प्रभावित क्षेत्र में त्वरित कार्रवाई की तैयारियों का आकलन किया जाएगा।

आपदा की स्थिति में समन्वित कार्रवाई की होगी जांच

इस माक अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रशासन, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और संबंधित आपात सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है। अभ्यास के माध्यम से संभावित कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि तेल या रासायनिक दुर्घटना की स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।