राज्य ब्यूरो, कोलकाता : बंगाल ने पिछले दो महीनों में कोरोना के टीके की 13 लाख अतिरिक्त खुराक अपने निर्धारित कोटे से निकालने में कामयाबी हासिल की है यानी एक शीशी में दी गई अतिरिक्त खुराक को बरबाद होने से बचाया गया है। बंगाल के बाद केरल ऐसा दूसरा राज्य है, जिसने कोरोना के टीके का कुशलता से इस्तेमाल कर केंद्र सरकार से प्रशंसा पाई है।

तकनीकी रूप से इस प्रक्रिया को 'नकारात्मक अपव्यय' कहा जाता है, जिसका अर्थ न केवल शून्य अपव्यय सुनिश्चित करना है बल्कि प्रत्येक शीशी में मौजूद अतिरिक्त खुराक का कुशलता से प्रबंधित करना है।राज्य के स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में कहा गया है कि पिछले दो महीनों में राज्य ने कोविशील्ड खुराक की माइनस सात प्रतिशत बरबादी दर्ज की है, जो टीकों की कम आपूर्ति को देखते हुए एक बडी़ उपलब्धि है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि टीके की एक शीशी में 10 शॉट्स देने के लिए पर्याप्त खुराक होती है लेकिन उत्पादक 'अपव्यय कारक' के रूप में प्रत्येक शीशी में एक अतिरिक्त खुराक जोड़ते हैं। ज्यादातर मामलों में हर बार टीके को सिरिंज में डालने पर टीके की एक छोटी मात्रा बरबाद हो जाती है। इस नुकसान की भरपाई के लिए शीशी में अतिरिक्त खुराक डाल दी जाती है लेकिन अगर टीका लगाने वाला कुशल है तो कई शीशियों से 11 लोगों को टीका लगाने के लिए इस अतिरिक्त खुराक को बचाना संभव है।

अधिकारी ने आगे कहा कि बंगाल में टीके की नकारात्मक बरबादी अब लगभग माइनस सात प्रतिशत है और टीकाकरण अभियान के आगे बढ़ने के साथ बचाई जाने वाली मात्रा और भी बढ़ जाएगी। दूसरे शब्दों में प्रत्येक एक लाख खुराक पर राज्य सरकार 7,000 अतिरिक्त खुराक का प्रबंधन कर रहा है। इसी तरह की दक्षता केरल द्वारा भी दर्ज की गई है। कोवैक्सिन के मामले में, बंगाल में शुरू में एक प्रतिशत अपव्यय था। इसे घटाकर शून्य कर दिया गया है। सूत्रों ने कहा कि प्रारंभिक अपव्यय की वजह टीका लगाने को लेकर लोगों की झिझक थी। 10 खुराक वाली शीशी को खोलने के चार घंटे के भीतर उसका उपयोग करना होता है। इस विंडो के दौरान अपर्याप्त लोगों के आने के कारण अपव्यय हुआ।

मई के आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि केरल और बंगाल झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के विपरीत हैं, जहां क्रमशः 33.9 और 15.7 प्रतिशत बर्बादी दर्ज की गई। मध्य प्रदेश (7.3 प्रतिशत), दिल्ली (3.9 प्रतिशत), गुजरात (3.6 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (3.7 प्रतिशत) में अपव्यय उनसे कम है। मंगलवार शाम तक, बंगाल में लगभग 2,45,29,000 खुराकें दी जा चुकी हैं, जिनमें से लगभग 28 लाख खुराक निजी टीकाकरण केंद्रों द्वारा की गई हैं। मई के बाद से निजी क्षेत्र के लिए 25 लाख खुराक के अलावा राज्य को अब तक सरकारी केंद्रों के लिए कुल 1.93 करोड़ कोविशील्ड और 32 लाख कोवैक्सिन खुराक सरकारी केंद्रों के लिए प्राप्त हुए हैं। टीके की आपूर्ति ने राज्य में टीकाकरण की गति को धीमा कर दिया है। जून के तीसरे सप्ताह के आसपास प्रतिदिन तीन लाख से अधिक खुराकें दी जा रही थीं। अब यह आंकड़ा दो लाख से अधिक है।

Edited By: Vijay Kumar