राज्य ब्यूरो, कोलकाता। Politics On Electricity. बंगाल की ममता सरकार दिल्ली की तर्ज पर बिजली से अपनी राजनीतिक राह रोशन करने की जुगत में है। हालिया पेश राज्य बजट में त्रैमासिक तौर पर 75 यूनिट बिजली मुफ्त में देने की घोषणा के बाद अब राज्य सरकार ने अपने बिजली विभाग के कर्मचारियों का वेतन भी एकबारगी काफी बढ़ा दिया है। इससे बिजली विभाग की विभिन्न इकाइयों के करीब 20,000 कर्मचारी लाभान्वित होंगे। इसी साल होने वाले कोलकाता नगर निगम एवं 107 निकायों के चुनाव एवं अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इन दोनों कदम को काफी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

राज्य सरकार ने ये सब ऐसे समय किया है, जब वह खुद भारी आर्थिक संकट का सामना कर रही है। मुफ्त बिजली और वेतन वृद्धि से उसपर और करोड़ों रुपये का आर्थिक बोझ चढ़ेगा। गौरतलब है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार लोगों को 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त में दे रही है। दिल्ली के विधानसभा चुनाव में उसे इसका काफी फायदा भी मिला था। ममता सरकार ने भी बंगाल में मुफ्त बिजली देने लिए 'हांसिर आलो योजना' की घोषणा की। बंगाल विधानसभा में वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री अमित मित्रा ने कहा कि तीन महीने में 75 यूनिट तक बिजली खपत करने वालों को अब कोई बिल नहीं भरना होगा। इस योजना से राज्य के 35 लाख गरीब परिवार लाभांवित होंगे।

मुफ्त बिजली के बाद राज्य सरकार ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के वेतन वृद्धि की मांग की भी सुध ली। बिजली मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने बताया कि वेस्ट बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कार्पोरेशन, वेस्ट बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कार्पोरेशन और दुर्गापुर प्रोजक्ट्स लिमिटेड के कर्मचारी वेतन वृद्धि के दायरे में आएंगे। वेतन वृद्धि को एक जनवरी, 2020 से प्रभावी माना जाएगा। नई वेतन संरचना राज्य सरकार की नीतियों के अनुरूप होगी। इसका निर्धारण बेसिक एवं ग्रेड पे के मुताबिक किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि बिजली विभाग के कर्मचारियों को अन्य जो सुविधाएं मिल रही हैं, वे भी जारी रहेंगी। गौरतलब है कि अकेले वेतन वृद्धि से राज्य सरकार पर 450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ चढ़ने जा रहा है।

 

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