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अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक के नाम पर कई सिम, बंगाल पुलिस खंगाल रही लेन-देन का कनेक्शन

Published: Sun, 04 Oct 2026 04:19 PM (IST)

अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय के पास दूसरों के नाम पर कई सिम कार्ड मिले हैं, जिनकी पुलिस लेनदेन और संभावित यूपीआई उपयोग की जांच कर रही है।

अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक के नाम पर कई सिम।

अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक के नाम पर कई सिम।

HighLights

  1. सुमित राय के पास दूसरों के नाम पर कई सिम कार्ड बरामद हुए।

  2. पुलिस सिम कार्ड के संभावित यूपीआई लेनदेन की गहन जांच कर रही है।

  3. पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन पर नजरुल महोत्सव खर्च में भ्रष्टाचार का आरोप।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। ममता तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय के पास अपने नाम के अलावा कई अन्य लोगों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड मिलने के बाद पुलिस उनके इस्तेमाल और संभावित लेनदेन की जांच कर रही है।

जांच में सामने आया है कि इनमें से अधिकांश सिम कालीघाट और आसपास के इलाके के लोगों के नाम पर हैं। पुलिस अब संबंधित सिम धारकों को सुमित के सामने बैठाकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

सुमित के इस्तेमाल वाले फोन में एक सिम उनके नाम पर था, जबकि कई अन्य सिम दूसरे लोगों के नाम पर मिले। पुलिस यह पता लगा रही है कि सुमित ने दूसरे लोगों के नाम पर सिम कैसे हासिल किए और क्या संबंधित लोगों की इसमें सहमति थी।

जांच अधिकारियों को आशंका है कि कई सिम लेने का इस्तेमाल यूपीआइ के जरिए बड़े रकम के लेनदेन के लिए किया गया हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया है। पुलिस सिम धारकों से पूछताछ के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होने की बात कह रही है।

सुमित राय को पहले शालबनी के जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें नए सिरे से गिरफ्तार दिखाकर रेत तस्करी के मामले में भी जोड़ा गया।

महोत्सव के खर्च में भारी अंतर, पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत

पूर्व सूचना एवं संस्कृति मंत्री इंद्रनील सेन के कार्यकाल में नजरुल महोत्सव के आयोजन पर हुए खर्च को लेकर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई है।

आरोप है कि 2025 में शिशिर मंच पर हुए उसी महोत्सव पर 37 लाख 92 हजार 53 रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि इस वर्ष राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद सूचना एवं संस्कृति विभाग ने आयोजन पर एक लाख 44 हजार 400 रुपये खर्च किए। इसी अंतर को आधार बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत किए जाने की बात सामने आई है।

शिकायत में तत्कालीन मंत्री इंद्रनील सेन के साथ विभाग के कई अधिकारियों और शिशिर मंच के अधिकारी तपन तरफदार का नाम भी शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।