बंगाल के सरकारी अस्पतालों में अगले साल से पूजा की लंबी छुट्टियों पर रोक, स्वास्थ्य मंत्री ने की घोषणा
बंगाल के सरकारी अस्पतालों में अगले साल से दुर्गापूजा के दौरान लंबी छुट्टियों की परंपरा समाप्त हो जाएगी।

बंगाल में अगले साल से सरकारी अस्पतालों में लंबी पूजा छुट्टियों पर रोक।
HighLights
अगले साल से सरकारी अस्पतालों में लंबी पूजा छुट्टियां समाप्त।
स्वास्थ्य मंत्री ने 1947 से चली आ रही परंपरा रोकी।
त्योहारों में भी चिकित्सा सेवाएं अब निर्बाध जारी रहेंगी।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के सरकारी अस्पतालों में अगले साल से दुर्गापूजा के दौरान लंबी छुट्टियों की परंपरा समाप्त हो जाएगी। षष्ठी से कोजागरी लक्ष्मी पूजा तक करीब 10 दिनों तक चलने वाला छुट्टी जैसा माहौल अब नहीं रहेगा।
स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने शुक्रवार को यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं अत्यावश्यक श्रेणी में आती हैं, इसलिए अस्पतालों में अन्य सरकारी विभागों की तरह लंबे समय तक छुट्टी नहीं हो सकती।
1947 से चली आ रही परंपरा होगी समाप्त
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 के बाद से सरकारी अस्पतालों में षष्ठी से लक्ष्मी पूजा तक छुट्टी जैसा माहौल रहने की परंपरा बन गई थी। अब इसे समाप्त किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगले साल से सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी के लिए ही विशेष पूजा रोस्टर लागू होगा। इस वर्ष पहले से छुट्टी पर गए कर्मचारियों की छुट्टी रद कर उन्हें काम पर लौटने के लिए कहा गया है।
गैर-चिकित्सकीय कर्मचारियों की आधी उपस्थिति
मंत्री के अनुसार, इस वर्ष मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक, प्राचार्य, एमएसवीपी, नान-मेडिकल सुपरिटेंडेंट और सफाईकर्मियों सहित सभी कर्मचारियों को काम पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी अस्पतालों में अगले साल भी सप्तमी से दशमी तक चार दिनों के लिए विशेष रोस्टर लागू होगा। इस दौरान गैर-चिकित्सकीय कर्मचारियों की उपस्थिति सामान्य संख्या की आधी रखी जाएगी। हालांकि, डाक्टरों और नर्सों के लिए कोई पूर्वनिर्धारित रोस्टर नहीं होगा।
उन्हें अस्पताल की जरूरत और मरीजों की चिकित्सा संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार ड्यूटी पर उपस्थित रहना होगा। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में वर्षों से चली आ रही छुट्टी जैसी व्यवस्था अब समाप्त होगी।
सरकार का उद्देश्य त्योहारों के दौरान भी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं निर्बाध बनाए रखना है, ताकि मरीजों को जरूरी इलाज के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।
