'दिनकर हमारे आराध्य, राष्ट्र निर्माण में योगदान अतुलनीय', कोलकाता में रश्मिरथी के हीरक जयंती वर्ष पर बोले बंगाल के राज्यपाल
बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने कोलकाता में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उनकी रचनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रकवि दिनकर की रचनाएं जन-जन तक पहुंचें- राज्यपाल आरएन रवि
HighLights
राज्यपाल रवि ने दिनकर की रचनाओं को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।
उन्होंने दिनकर के राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान की सराहना की।
मुजीब खान को राष्ट्रकवि दिनकर संस्कृति सम्मान से सम्मानित किया गया।
जागरण संवाददाता, कोलकाता। बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने बुधवार को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के राष्ट्र के लिए योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है।
राज्यपाल ने बिना नाम लिए केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि मुझे कभी-कभी बहुत पीड़ा होती है कि इतने बड़े महान कवि और राष्ट्रप्रेमी को जो उचित सम्मान मिलना चाहिए था दुर्भाव्यवश वह नहीं मिला। उस सम्मान का हम सबको इंतजार है।
दिनकर की जयंती एवं उनकी कालजयी काव्यकृति रश्मिरथी के हीरक जयंती वर्ष (75 साल पूरे होने) पर कोलकाता लोकभवन में आयोजित रश्मिरथी पर्व व नाटय मंचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में दिनकर का योगदान हमेशा अतुलनीय रहा है और रहेगा।
दिनकर और उनकी कविताएं कालजयी हैं। रवि ने कहा कि दुर्भाव्यवश दिनकर पाठयक्रम से दूर होते चले गए अथवा उन्हें दूर किया गया। लोकभवन के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास, दिल्ली द्वारा किया गया।
इस अवसर पर मुंबई के वरिष्ठ रंगकर्मी मुजीब खान को राष्ट्रकवि दिनकर संस्कृति सम्मान से राज्यपाल के हाथों सम्मानित किया गया। सम्मानस्वरूप उन्हें शाल, प्रतीक चिन्ह और एक लाख रुपये का चेक दिया गया। इस दौरान मैं विभा-पुत्र, जागरण गान है मेरा स्मारिका का भी राज्यपाल ने विमोचन किया।
कार्यक्रम में मुंबई से आए 20 से अधिक कलाकारों ने रश्मिरथी का शानदार नाटय मंचन भी किया, जो आकर्षण का केंद्र रहा। कार्यक्रम में बंगाल के संसदीय कार्य व शहरी विकास राज्यमंत्री उमेश राय, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मंच संचालन प्रसिद्ध कवि डा संजय पंकज (मुजफ्फरपुर, बिहार) ने किया।
दिनकर हमारे अराध्य हैं, मैं उनकी पूजा करता हूं
अपने जीवन पर दिनकर के व्यक्तित्व व साहित्य के गहरे प्रभाव का उल्लेख करते हुए राज्यपाल रवि ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से मेरे जीवन को गढ़ने व संवारने में उनकी रचनाओं की बहुत बड़ी भूमिका रही है। मेरा दुर्भाग्य है कि उनसे मुझे मिलने का अवसर नहीं मिला। 1974 में जब उनका स्वर्गवास हुआ तो मैं उस समय पोस्ट ग्रेजुएट का छात्र था।
रवि ने यहां तक कहा कि दिनकर हमारे अराध्य हैं, मैं उनकी पूजा करता हूं। मेरा जीवन सदैव उनका ऋणी रहेगा। बचपन के दिनों को याद करते हुए रवि ने कहा कि लक्ष्य हमेशा ऊंचे होना चाहिए और और उसके लिए जीवन समर्पित कर देना वह दिनकर ने ही सिखाया।
उन्होंने याद किया कि कैसे 1962 के युद्ध के समय जब राष्ट्र के सामने संकट की स्थिति थी और जब देश को हौसला व ऊर्जा की जरूरत थी उस विपरीत परिस्थितियों में सेना व अपने नागरिकों का जोश बढ़ाने के लिए दिनकर ने कहा था कि एक राष्ट्र को जितना पांच नोबेल पुरस्कार विजेताओं को पैदा करने में जितना गौरव का अनुभव प्राप्त नहीं होता, उतना एक युद्ध जीतने में होता है।
उन्होंने कहा कि दिनकर ने देश को जगाया। दिनकर ने हमें सिखाया कि शक्ति मांगने या याचना से नहीं मिलती, यह अर्जित की जाती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार दिनकर के बताए मार्ग पर चल रही है। राज्यपाल ने यह भी कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर के जन्मदिवस पर इस कार्यक्रम का आयोजन कोलकाता लोक भवन के लिए गौरव की बात है।
