जागरण संवाददाता, कोलकाता। बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और ममता सरकार के बीच की कड़वाहट एक बार फिर उभरकर सामने आ गई। राज्यपाल ने मंगलवार को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा-'पूजा कार्निवल में मुझे बुलाकर मेरा अपमान किया गया। मैं चार घंटे तक वहां मौजूद था, लेकिन मुझे कहीं नहीं दिखाया गया। मेरे नाम तक का उल्लेख नहीं किया गया। मुझे ब्लैकआउट कर रखा गया। इससे मुझे काफी अपमान का बोध हुआ। मेरी आंखों में आंसू आने जैसी हालत हो गई थी। मैं तीन दिन तक इसे लेकर चिंतन करता रहा।'

राज्यपाल को मंच पर किनारे की सीट दी गई

राज्यपाल ने आगे कहा-'मेरे शपथ लेने वाले दिन ही मुख्यमंत्री ने मुझे कार्निवल के लिए आमंत्रित किया था। बाद में भी जब वह मुझसे मिलीं तो मुझे इसकी याद दिलाती रहीं, लेकिन कार्निवल के दिन कुछ सेंकेंड के लिए भी वह मेरा स्वागत करने नहीं पहुंची और जब मैं निकल रहा था, तब किसी तरह विदाई देने पहुंचीं। राज्य का प्रथम नागरिक होने के नाते यह मेरा ही नहीं, बल्कि बंगाल के प्रत्येक नागरिक का अपमान है। इस घटना ने मुझे इमरजेंसी की याद दिला दी।' सूत्रों के मुताबिक कानिर्वल में अपने बैठने की व्यवस्था से धनखड़ खुश नहीं थे। राज्यपाल को मंच पर किनारे की सीट दी गई थी।

पहले भी उभरा है विवाद

इससे पहले जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) में केंद्रीय राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो को कुछ वामपंथी छात्रों द्वारा रोककर रखे जाने को लेकर ममता सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद सामने आया था। राज्यपाल खुद बाबुल को लाने विवि पहुंचे थे, जिसपर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। तब राज्यपाल ने कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तृणमूल के महासचिव तथा राज्य के मंत्री पार्थ चटर्जी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि राज्यपाल ने राज्य सरकार को इस बाबत सूचना नहीं दी और विवि जाने से पहले सरकार को विश्वास में नहीं लिया। उनका यह बयान तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। मुर्शिदाबाद के जियागंज में हुए तिहरे हत्याकांड पर राज्यपाल के बयान पर भी तृणमूल ने कड़ी आपत्ति जाहिर की थी।

पार्टी की प्रतिक्रिया 

तृणमूल कांग्रेस के मुख्‍य सचेतक तापस राय ने कहा कि राज्यपाल मीडिया में प्रचार नहीं मिलने से नाराज हैं, इसलिए ऐसा आरोप लगा रहे हैं। उन्हें सम्मान देने के लिए ही उनके लिए अलग से मंच बनाया गया था।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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