बंगाल में दुर्गा पूजा पर बदला राजनीतिक समीकरण, पंडालों में भाजपा की बढ़ी मौजूदगी; तृणमूल का घटा प्रभाव
बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं, जहां भाजपा नेताओं की उपस्थिति बढ़ी है और तृणमूल ...और पढ़ें

बंगाल दुर्गा पूजा में बदला राजनीतिक रंग
HighLights
दुर्गा पूजा पंडालों में भाजपा नेताओं की बढ़ी मौजूदगी।
तृणमूल के प्रमुख नेता पूजा आयोजनों से रहे दूर।
सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव दिखाने का एक बड़ा मंच भी रही है। राज्य में सत्ता परिवर्तन की झलक इस बार पूजा पंडालों में साफ दिखाई दे रही है जहां तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की गैर मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा इस उत्सव के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत एवं सामाजिक पहुंच प्रदर्शित कर रही है।
तृणमूल के 15 वर्षों के शासन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एक के बाद एक पूजा पंडालों का उद्घाटन करना कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले की गतिविधियों का अहम हिस्सा रहा है।
हालांकि, मई में सत्ता गंवाने के बाद इस साल ममता ने अपने कालीघाट स्थित आवास के पास केवल एक पूजा पंडाल का उद्घाटन किया। यह 2025 के उनके व्यस्त कार्यक्रम से बिल्कुल अलग है, जब उन्होंने 3,000 पूजा पंडालों का उद्घाटन किया था।
उद्घाटन समारोहों से तृणमूल नेता लगभग गायब
यह स्थिति केवल ममता तक सीमित नहीं है। तृणमूल के कई वरिष्ठ नेता, जिनका कभी कोलकाता के बड़े बजट वाले दुर्गा पूजा आयोजनों पर खासा प्रभाव था, इस बार उद्घाटन समारोहों से लगभग गायब हैं।
विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल संगठनात्मक संकट और आंतरिक उथल-पुथल से जूझ रही है। ऐसे समय में, जब दुर्गा पूजा नेताओं को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर आम लोगों से जुड़ने का अवसर देती है, पार्टी के नेता जनता के बीच पहले की तुलना में कम दिखाई दे रहे हैं।
पूर्व मंत्री अरूप विश्वास, सुजीत बोस और फिरहाद हकीम अपने-अपने राजनीतिक गढ़ों में प्रमुख पूजा समितियों के संरक्षक हुआ करते थे, लेकिन इस बार इन आयोजनों के आसपास भी नजर नहीं आ रहे हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले के चर्चित मामले में जमानत पर बाहर आए पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी भी प्रसिद्ध ‘नाकतला उदयन संघ’ की दुर्गा पूजा से दूर हैं।
मुख्यमंत्री सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे
इस खाली जगह को अब भाजपा भरती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी इस साल पूजा पंडालों के उद्घाटन कार्यक्रमों में सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्होंने कोलकाता के साथ-साथ विभिन्न जिलों में जाकर कई प्रसिद्ध पंडालों का दौरा और उनका उद्घाटन भी किया।
उनके दौरों में कोलकाता का ‘श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब’ खास रहा। यह पंडाल पहले सुजीत बोस के संरक्षण में था और पिछले साल इसका उद्घाटन ममता बनर्जी ने किया था। मंत्री दिलीप घोष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, मंत्री अग्निमित्रा पाल व लाकेट चटर्जी समेत भाजपा के अन्य प्रमुख नेता भी राज्य भर में पूजा पंडालों के उद्घाटन और उत्सव संबंधी कार्यक्रमों में प्रमुखता से नजर आए हैं। जो नेता कभी विपक्ष में रहकर तृणमूल को चुनौती देते थे, वे अब इस त्योहार के जरिए अपनी सामाजिक पहुंच बढ़ाने और पूजा आयोजकों के साथ संबंध मजबूत करने में जुटे हैं।
पूजा समितियों में नजर आ रहा बदलाव
पूजा समितियों में भी यह बदलाव स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। कई प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजनों में उद्घाटन और अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक रस्मों में शामिल होने वाले राजनीतिक चेहरों में अब नए नेता दिखाई दे रहे हैं। इसे राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।
उदाहरण के लिए, कोलकाता के ‘अहीरीटोला सार्वजनिक दुर्गोत्सव’ में इस साल प्रतिमा के नेत्र बनाने की पारंपरिक रस्म ‘चक्षुदान’ भाजपा विधायक व मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने निभाई। उन्होंने इस रस्म में तृणमूल की पूर्व मंत्री शशि पांजा की जगह ली।
इसी तरह, ‘मोहम्मद अली पार्क’ की दुर्गा पूजा में भी राजनीतिक जुड़ाव बदल गया जहां मंत्री तापस राय ने उद्घाटन किया, जबकि उत्तर कोलकाता से सांसद एवं तृणमूल के बागी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय को इस आयोजन से दूर रखा गया।
भाजपा नेता ने खुला गोलपोस्ट बताया
भाजपा के राज्यसभा सदस्य राहुल सिन्हा ने इस स्थिति को बिना किसी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी के खुला गोलपोस्ट बताया। उन्होंने कहा कि इस साल दुर्गा पूजा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में हमें किसी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
तृणमूल के वे कार्यकर्ता, जिनके लिए पूजा लोगों से धन वसूलने का जरिया मात्र थी, अब भाग खड़े हुए हैं। वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल के प्रवक्ता कृष्णु मित्रा ने कहा कि सामुदायिक दुर्गा पूजा आयोजनों का नियंत्रण तृणमूल से भाजपा के हाथों में जाना कोई स्वाभाविक बदलाव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन की सक्रिय भूमिका के जरिए दबाव बनाकर ऐसा कराया गया है।
केंद्र सरकार के गिरते ही भाजपा की राज्य सरकार भी ढह जाएगी। हमारे नेता फिर उत्सव के मंच पर लौटेंगे, क्योंकि जनता से उनका जुड़ाव स्वाभाविक और गहरा है। वहीं, भाजपा नेता एवं मंत्री डा. इंद्रनील खान ने कहा कि दुर्गा पूजा किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि हम यहां पूजा पंडालों पर कब्जा करने नहीं आए हैं। दुर्गा पूजा आम जनता का उत्सव है, किसी राजनीतिक दल का नहीं।
