राज्य ब्यूरो, कोलकाताः बंगाल विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन बुधवार को अंग्रेजों के जमाने  1864 में बने कानून को खत्म करने के लिए रखा गया बिल ध्वनि मत से पारित हो गया। यह कानून 158 वर्ष पूर्व जिले के विभाजन के लिए अंग्रेजों ने बनाया था। वित्तमंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में बंगाल जिला निरसन बिल,2022 पेश किया, जिस पर विपक्ष के शंकर घोष, विश्वनाथ कारक और सत्तापक्ष से पूर्व आइपीएस हुमायूं कबीर समेत एक और विधायक ने चर्चा में हिस्सा लिया। इस अनुपयोगी कानून को खत्म करने को लेकर अपने-अपने तर्क रखे।

1864 में संशोधन हुआ और तब से कानून लागू था

करीब एक घंटे की चर्चा के बाद मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि सबसे पहले बंगाल जिला अधिनियम 1836 में तैयार हुआ था। जिसमें बाद में 1864 में संशोधन हुआ और तब से कानून लागू था। इस कानून में लेफ्टिनेंट गवर्नर(एलजी) को विभाजन कर नया जिला बनाने का अधिकार दिया गया था। परंतु, बाद में नए जिला बनाने को लेकर नए कानून बने और यह कानून पूरी तरह से अनुपयोगी हो गया।

समाप्त करने के लिए बिल सदन के पटल पर रखा

अब दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) 1973 के तहत जिले विभाजित कर नए जिले बनाए जाते हैं। इसमें राज्य कैबिनेट के अनुमोदन के बाद विधानसभा में बिल पारित कर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद नया जिला बनता है। इसीलिए राज्य के कानून आयोग ने इस कानून को अनुपयोगी बताते हुए निरस्त करने की संस्तुति की थी। उसी अनुसार इसे समाप्त करने के लिए बिल सदन के पटल पर रखा गया है।

सौ वर्षों से अधिक पुराना यह तीनों कानून समाप्त

इसके बाद बिना किसी विरोध के ध्वनि मत से बिल पारित हो गया। बंगाल में जिलों की संख्या 2011 के बाद 19 से 23 हो चुकी है। बताते चलें कि इससे पहले अंग्रेजों के जमान के दो और कानून को निरस्त करने के लिए बिल विधानसभा में पारित हो चुका है। अब यह सभी बिल राज्यपाल के अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे। राज्यपाल का हस्ताक्षर होने के साथ ही सौ वर्षों से अधिक पुराना यह तीनों ही कानून समाप्त हो जाएगा।

Edited By: Vijay Kumar

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