बंगाल में भाजपा की लहर से पार पाने व सत्ता में फिर से वापसी के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कड़ा संघर्ष कर रही है। इन सबके बीच तृणमूल के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय का कहना है कि बंगाल को अपनी बेटी यानी ममता बनर्जी पर ही भरोसा है। बंगाल में भाजपा की सबसे बड़ी हार होगी और तीसरी बार तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि 2009 से लेकर अब तक बंगाल में हुए सभी चुनावों में तृणमूल को जनता का आशीर्वाद मिला है। इस बार भी बंगाल के लोग पीछे नहीं हटेंगे और जीत को दोहराएंगे। बंगाल के चुनावी हालात पर राज्यसभा में तृणमूल के मुख्य सचेतक सुखेंदु शेखर रॉय ने दैनिक जागरण के वरिष्ठ संवाददाता राजीव कुमार झा से खुलकर बातचीत की।

प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश:-

बंगाल का चुनाव बहुत हाईवोल्टेज हो गया है, क्या लग रहा है आपको?

देखिए, ये भाजपा का गेमप्लान है। पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बंगाल पर दखल करेंगे। बंगाल हमारा टार्गेट है। ममता बनर्जी की सरकार को उखाड़कर फेंक दो। जितने भी गैर संवैधानिक व गैर लोकतांत्रिक शब्द हैं, उन सभी का इस्तेमाल किया गया। तो हम और हमारी पार्टी ने कहा- यदि टार्गेट करना है तो चीन व पाकिस्तान को करो, क्योंकि उन्होंने हमारा बहुत सारा जमीन कब्जा कर रखा है। बंगाल तो हिंदुस्तान का ही एक अंग है, तो किसी प्रदेश को केंद्र सरकार टार्गेट कर सकती है क्या? हम भारत के बाहर या दुश्मन हैं क्या? उन्होंने बंगाल की जनता को टार्गेट किया। ये इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि यहां की जनता नरेंद्र मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ ममता बनर्जी के नेतृत्व में शुरू से विरोध कर रही है। तो ये उनके लिए चिंता का विषय है। कोई पार्टी उतना विरोध नहीं कर रही है, सिर्फ टीएमसी व बंगाल की आम जनता ही कर रही है। इसीलिए उन्होंने सोचा किसी तरह हमको यहां दखल करना है। लेकिन, बंगाल में जब भी कोई दखलंदाजी की राजनीति करने आया, उसे मुंहतोड़ जवाब मिला है। इस बार भी जवाब मिलेगा।

पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह 200 से भी ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं, इस बारे में आप क्या कहेंगे?

देखिए, बंगाल में कुल 294 सीटें हैं। उन्होंने 294 क्यों नहीं बोला? सिर्फ 200 क्यों कहा? 200 और 294 में क्या अंतर है। बोलते हम 294 जीतेंगे। ये कोई दावा होता है क्या। हम यहां बैठकर आम खाएंगे क्या?

आठ चरणों में चुनाव का आपलोग विरोध कर रहे हैं और लगातार चुनाव आयोग व केंद्रीय बल पर आरोप लगा रहे हैं, क्यों?

आठ चरण में करें या 18 चरण में, इसमें हमें कोई दिक्कत नहीं है। एक चरण में जो नतीजा निकलेगा वही 18 चरण में भी निकलेगा। लेकिन, जिस बुरी तरह से केंद्रीय सुरक्षा बल का भाजपा सरकार इस्तेमाल कर रही है, उसके खिलाफ हम आवाज उठा रहे हैं। यहां तक कि केंद्रीय बल मतदाताओं को डरा-धमका रहे हैं। हमारे प्रत्याशी तक पर हमला हुआ। महिला रिपोर्टर तक के साथ जवानों ने मारपीट की। सीआरपीएफ जवान ने एक नाबालिग तक के साथ छेड़छाड़ की। आयोग को यह सब नहीं दिख रहा है। आयोग वही काम कर रहा है जो उसे भाजपा से निर्देश मिल रहे हैं। ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई।

पीएम मोदी बोल रहे हैं कि हार की हताशा में टीएमसी केंद्रीय बल व आयोग पर आरोप लगा रही है?

कोई भी सरकारी प्रतिष्ठान या संपत्ति पर चुनाव कैंपेन का कोई बोर्ड या बैनर आदि नहीं रह सकता है, लेकिन आप जाकर देखिए कोलकाता शहर में। जितने बस स्टैंड हैं वहां नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी है। चुनाव आयोग क्या नहीं देख पा रहा है। यहां तक कि मोदी की सभा में आने व भाजपा को वोट देने के लिए 1000 रुपये के कूपन बांटे जा रहे हैं। उसमें मोदी की तस्वीर है, पार्टी का नाम व जगह का उल्लेख है। ऐसे वोट खरीदने का प्रयास बंगाल की राजनीति में पहले कभी नहीं हुआ। मैं 53 साल से राजनीति में हूं, कभी भी मैंने नहीं देखा कि कोई भी पार्टी वोट खरीदने के लिए कूपन व पैसा देकर लोगों को लुभाने का प्रयास कर रही है। नरेंद्र मोदी सरकार का तो यही तरीका है। हर जगह यही करता है। चाहे राफेल खरीदने का मामला हो या पीएम केयर्स फंड का। किसी को उसके बारे में कुछ पता नहीं है। पीएम केयर्स फंड किसलिए बनाया गया, कहां से पैसा आ रहा है, कहां किस काम के लिए पैसा जा रहा है, इसके बारे में कोई जानकारी देश के आम आदमी की तो छोडि़ए सांसदों को भी नहीं है। सीएजी भी इसका ऑडिट नहीं करेगा। आरटीआइ से भी जानकारी नहीं मिलेगी। तो इतनी गुप्पी-चुप्पी क्यों? किसको गुमराह करना चाहते हैं। हिंदुस्तान में इतनी बड़ी कटमनी की सरकार व इतनी भ्रष्ट सरकार पहले कभी नहीं आया था।

आपके कई कद्दावर नेता, मंत्री, विधायक पार्टी छोड़कर चले गए, क्या कहना है इस बारे में?

देखिए, हम जिसको टिकट नहीं देने वाले थे, वही लोग चले गए। उनके खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों सहित कई रिपोर्ट थीं। उनके जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

क्या वाममोर्चा-कांग्रेस व आइएसएफ गठबंधन भी आपके लिए चुनौती है?

इसका कोई असर नहीं है। पिछले चुनाव में भी कांग्रेस व वाममोर्चा मिलकर लड़े थे। इस बार उन्होंने एक सांप्रदायिक मुस्लिम पार्टी आइएसएफ को भी साथ में लिया है। लेकिन, नतीजा पिछली बार से भी बुरा होगा। क्योंकि, उनकी असलियत सबके सामने आ चुकी है। ये मुंह से बोलते हैं कि हम सेक्युलर हैं, लेकिन कितने कम्युनल हैैं, वह सांप्रदायिक पार्टी को साथ लेने के बाद सब पानी की तरह साफ हो गया है। सब जान गए हैं कि ये लोग क्या कर रहे हैं। उन्हें वोट नहीं मिलेगा।

भाजपा बोल रही है, टीएमसी का खेला खत्म होगा और विकास शुरू होगा, इसपर क्या कहेंगे?

बंगाल में टीएमसी की सरकार में जो विकास हुआ है, हिंदुस्तान के किसी भी राज्य में नहीं हुआ है। एक भी भाजपा शासित राज्य का नाम आप बताइए। कहीं भी कोई विकास नहीं हुआ। उसका बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं का नारा तो बेटी पिटाऊ... हो गया। किसान आज भी आत्महत्या कर रहे हैं। इसका कोई जवाब नहीं है। काला धन हम वापस लाएंगे और सबके खाते में 15-15 लाख रुपये दे देंगे, 15 पैसा भी आज तक किसी को नहीं आया। दो करोड़ नौजवानों को हर साल नौकरी देने का वादा किया था, आज 45 साल में भारत में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। भाजपा का देश में यही योगदान है। वो जो भी बोलते हैं, झूठ बोलते हैं और लोगों को लुभाते हैं। आज वे (भाजपा) हर-हर मोदी, घर-घर मोदी नहीं बोलते हैं। क्योंकि आज आम जनता बोल रही हैं हर-हर मोदी, घर-घर बर्बादी। ये बर्बादी...वे बैंकों को, रेल को, सेल को, हवाई अड्डे को बेच रहे हैं। सारे पीएसयू को निजी क्षेत्र के हाथों बेचा जा रहा है और उसके बदलते कट मनी ले रहा है। अडानी को झारखंड में छह कोल ब्लॉक मिल गया। उसको पांच-छह एयरपोर्ट भी मिल गया और यह सिलसिला चल रहा है। यहां वह (भाजपा नेता) बोलते हैं सोनार बांग्ला बनाएंगे। पहले सोनार गुजरात, सोनार उत्तर प्रदेश बनाओ, फिर सोनार बांग्ला बनाना।

आप जीत के प्रति कितने आश्वस्त हैं?

 हम 100 फीसद आशावादी हैं। बंगाल में 2009 से लेकर अब तक लोकसभा, पंचायत, नगरपालिका, विधानसभा व लोकसभा चुनाव के लिए 19 बार वोट डाले गए हैं। हर बार टीएमसी के पक्ष में मतदान किया गया। यही नहीं, जनता ने भारी बहुमत से जिताया। इस बार भी यह दोहराया जाएगा। बंगाल को अपनी बेटी ममता दीदी पर ही भरोसा है।2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा की सबसे बड़ी हार होगी। 

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