कोलकाता, राजीव कुमार झा। उत्तर कोलकाता की हॉट सीट चौरंगी में इस बार दिलचस्प मुकाबला देखा जा रहा है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस सीट से एक बार फिर मैदान में खड़ी निवर्तमान विधायक नयना बंधोपाध्याय की नैया इस बार आसान नहीं दिख रही है। लोकसभा में तृणमूल संसदीय दल के नेता व उत्तर कोलकाता से सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की पत्नी नयना को संयुक्त मोर्चा और भाजपा उम्मीदवारों से कड़ी टक्कर मिल रही है। संयुक्त मोर्चा की तरफ से प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष संतोष पाठक मैदान में हैं। यहां के 44 नंबर वार्ड से कई बार पार्षद रह चुके संतोष पाठक की इस क्षेत्र में गहरी पैठ है। साथी ही वे हिंदीभाषी भी हैं और इस विधानसभा क्षेत्र में हिंदी भाषियों का बोलबाला है। यहां जीत-हार तय करने में हिंदी भाषी मतदाताओं की अहम भूमिका है। दूसरी ओर भाजपा भी इस सीट पर जीत के लिए पूरा जोर लगा रही है। भाजपा की ओर से देवव्रत माजी मैदान में हैं। भगवा लहर में भाजपा को लग रहा है जिस प्रकार से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी लगातार बाहरी- बाहरी कर रही है कि ऐसे में इस बार हिंदी भाषियों सहित अन्य लोगों का उसे समर्थन मिलेगा। ऐसे में चौरंगी में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा रहा है और यहां कांटे की टक्कर है। 

 2006 से इस सीट पर तृणमूल का है कब्जा

 एशिया के सबसे बड़े बाजार के रूप में प्रसिद्ध कोलकाता के बड़ा बाजार का अधिकतर इलाका  चौरंगी विधानसभा क्षेत्र में ही पड़ता है। बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोग यहां व्यापार व्यवसाय- करते हैं। इस सीट पर साल 2006 से तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी ने 2006 में यहां से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2011 में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिवंगत सोमेन मित्रा की पत्नी शिखा मित्रा ने यहां से जीत दर्ज की थी। हालांकि तब सोमेन व शिखा मित्रा तृणमूल में ही थे और बाद में दोनों ने पार्टी छोड़ दी। इसके बाद 2014 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में तृणमूल के टिकट पर नयना बंदोपाध्याय ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में नयना ने अपनी जीत को दोहराते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी व दिग्गज कांग्रेस नेता दिवंगत सोमेन मित्रा को 13,260 मतों के अंतर से करारी शिकस्त दी। वहीं, तीसरे नंबर पर 15,707 वोटों के साथ भाजपा उम्मीदवार रितेश तिवारी रहे थे। 

 भाजपा-टीएमसी के बीच सियासी घमासान

 वहीं, साल 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को कोई भी दल गंभीरता से नहीं ले रही थी। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भाजपा ने बंगाल में धमाकेदार प्रदर्शन किया और 18 सीटें जीतीं जिसके बाद अब यहां पर भाजपा, तृणमूल की सबसे निकटतम प्रतिद्वंद्वी दिखाई दे रही है। बंगाल के मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए इस बार कुछ भी कहना मुश्किल है।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप