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'ट्रिब्यूनल में मामला पेंडिंग तो नहीं मिलेगा फार्म-6', बंगाल में वोटर लिस्ट विवाद पर CEO ने दूर किया भ्रम

Published: Thu, 08 Oct 2026 09:11 PM (GMT+05:30)

बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं की अपीलें विभिन्न न्यायाधिकरणों में लंबित हैं, उन्हें बूथ स्तरीय अधिकारी घर-घर जाकर फार्म 6 नहीं देंगे।

बंगाल में मतदाता सूची विवाद (सांकेतिक तस्वीर)

बंगाल में मतदाता सूची विवाद (सांकेतिक तस्वीर)

राज्य ब्यूरो, कोलकाता । मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर जिन लोगों की अपीलें विभिन्न न्यायाधिकरणों में लंबित हैं, उन्हें बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर फार्म 6 नहीं देंगे। बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों के फैसले और अपीलीय न्यायाधिकरण में लंबित मामलों पर निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी या जिला निर्वाचन अधिकारी फैसला नहीं ले सकेंगे।

सीईओ कार्यालय ने 10 मार्च, 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार न्यायिक अधिकारियों द्वारा दिए गए आदेशों के खिलाफ किसी कार्यपालिका या प्रशासनिक अधिकारी के समक्ष अपील नहीं की जा सकती।

मालूम हो कि निर्वाचन आयोग ने हाल में जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखकर बीएलओ को घर-घर भेजकर उन मतदाताओं की पहचान करने का निर्देश दिया था, जिनके नाम पहले की मतदाता सूची में थे, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की बाद वाली सूची में नहीं हैं।

अधिकारियों को पहले की सूची और वर्तमान सूची का मिलान कर ऐसे सभी मतदाताओं की सूची तैयार करनी है। पात्र मतदाताओं के नाम फार्म 6 के माध्यम से मतदाता सूची में शामिल कराने की सुविधा देने को कहा गया था।

प्रत्येक बीएलओ को सप्ताह में कम से कम 20-25 ऐसे मतदाताओं तक पहुंचने और करीब एक महीने में यह प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य दिया गया था। इस निर्देश के बाद यह भ्रम पैदा हो गया था कि न्यायाधिकरण में लंबित अपील वाले मतदाताओं के नाम भी फार्म 6 के जरिये दोबारा जोड़े जा सकते हैं या नहीं।

सीईओ कार्यालय ने इस भ्रम को दूर किया है। मालूम हो कि अकेले कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में ही 85 हजार से अधिक मतदाताओं की अपीलें न्यायाधिकरणों में लंबित हैं। सीईओ कार्यालय ने पहले कहा था कि अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और हटाए गए मतदाताओं की सूची में छूट गए पात्र मतदाता फार्म 6 के माध्यम से आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

पहली बार मतदाता बनने वाले भी इसके जरिये आवेदन कर सकते हैं, हालांकि, न्यायिक अधिकारियों के आदेश से जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनके लिए यह सुविधा लागू नहीं है।