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बंगाल में सत्ता में आने के बाद भाजपा ने संगठनात्मक अनुशासन पर दिया जोर, 50 से अधिक नेताओं को नोटिस

Published: Fri, 22 May 2026 11:33 PM (IST)

बंगाल में सत्ता में आने के बाद भाजपा ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर अपनी रणनीति बदली है।

भाजपा ने अनुशासन में कठोरता की जगह संयम अपनाया

भाजपा ने अनुशासन में कठोरता की जगह संयम अपनाया

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आने के बाद भाजपा अब संगठनात्मक अनुशासन को लेकर पहले से अधिक सतर्क और संयमित दिख रही है। पांच साल पहले, जब पार्टी विपक्ष में थी और आंतरिक असंतोष से जूझ रही थी, तब अनुशासनहीनता के मामलों में कठोर भाषा और खुली कार्रवाई की जाती थी। लेकिन अब, जबकि भाजपा 207 सीटों के साथ सत्ता में है, पार्टी ने ‘कठोरता’ की जगह ‘संयम’ की रणनीति अपनाई है।

राज्य भाजपा की अनुशासन समिति ने अब तक 50 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को शो-काज नोटिस भेजे हैं। आरोपों में राजनीतिक हिंसा, विरोधी दलों के समर्थकों पर हमला, धमकी देकर वसूली और सिंडिकेट संस्कृति को बढ़ावा देने जैसे मामले शामिल हैं। हालांकि इन नोटिसों में व्यवहारिक तौर पर निलंबन जैसी स्थिति बनाई गई है, लेकिन ‘सस्पेंड’ या ‘बरखास्त’ जैसे शब्दों से जानबूझकर परहेज किया गया है।

भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि सत्ता में आने के बाद पार्टी तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति को नहीं अपनाएगी। उनका कहना है कि बंगाल की चुनावी संस्कृति बदलने के वादे पर जनता ने भाजपा को जनादेश दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा अब यह संदेश देना चाहती है कि अनुशासनहीनता पर कार्रवाई होगी, लेकिन सुधार का अवसर भी मिलेगा।

सत्ता के साथ जिम्मेदारी और राजनीतिक परिपक्वता भी बढ़नी चाहिए— भाजपा की नई कार्यशैली इसी सोच को सामने ला रही है। पार्टी नहीं चाहती कि सत्ता में आने के बाद उसका व्यवहार प्रतिशोधात्मक या दमनकारी दिखे। प्रदेश अध्यक्ष यह संदेश दे रहे हैं कि बंगाल की हिंसक चुनावी संस्कृति को बदलना ही भाजपा की प्राथमिकता है। उन्होंने साफ कहा है कि सत्ता का इस्तेमाल सिंडिकेट, उगाही या राजनीतिक दबाव बनाने के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

2021 में जब पार्टी विपक्ष में थी, तब रितेश तिवारी, जयप्रकाश मजूमदार और अन्य नेताओं को “सामयिक बरखास्त” जैसे कठोर शब्दों के साथ निलंबित किया गया था। लेकिन अब पार्टी सत्ता में होने के बावजूद अधिक संयमित शब्दावली अपना रही है। भाजपा के भीतर इसे “सत्ता के साथ बढ़ी जिम्मेदारी” का संकेत माना जा रहा है।