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चोरबागान हादसे के बाद बंगाल में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल की चुनौती, कैसे बनेगा समन्वय?

By indrajeet singhEdited By: Harsh Katare
Published: Thu, 22 Oct 2026 05:47 PM (GMT+05:30)

चोरबागान भगदड़ और माकपा पुस्तक स्टालों पर हमलों के बाद बंगाल में भाजपा सरकार और संगठन के बीच समन्वय की कमी सामने आई है।

सरकार और संगठन के बीच तालमेल की चुनौती

सरकार और संगठन के बीच तालमेल की चुनौती

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संक्षेप में पढ़ें

इंद्रजीत सिंह, कोलकाता। बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के छह महीने के भीतर सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की जरूरत महसूस होने लगी है। दुर्गापूजा के दौरान चोरबागान में भगदड़ से 19 लोगों की मौत और माकपा के पुस्तक स्टालों पर हमलों की घटनाओं ने पार्टी का ध्यान इन मुद्दों की ओर खींचा है।

इन घटनाओं पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और अन्य नेताओं के अलग-अलग बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि सरकार और संगठन के बीच संवाद को और मजबूत बनाने की गुंजाइश है।

चोरबागान की दुर्गापूजा समिति में भाजपा से जुड़े नेताओं की भूमिका को लेकर चर्चा हुई। प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की सलाह के बावजूद स्थानीय नेताओं के समिति में प्रमुख पदों पर रहने की बात सामने आई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भतीजे का नाम भी समिति से जुड़ने के कारण इस मामले ने राजनीतिक ध्यान खींचा।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने यातायात नियंत्रण कक्ष, अस्पतालों और विसर्जन घाटों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और व्यवस्था को संभालने की कोशिश की। घटना के बाद ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे।

वहीं, शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि ड्यूटी में लापरवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इतनी मौतों के पीछे साजिश की बात पर विश्वास करना कठिन है। उन्होंने जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई। अब हादसे के कारणों की पड़ताल और जिम्मेदारी तय करने के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना प्रशासन के लिए अहम है।

पुस्तक स्टालों पर हमलों की निंदा

माकपा के पुस्तक स्टालों पर हमलों, किताबें फाड़ने और स्टालों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं ने भी ध्यान खींचा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने इन घटनाओं की निंदा की। पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने भी पुस्तक संस्कृति पर हमलों को अनुचित बताया।

मंत्री स्वपन दासगुप्त ने कहा कि किताबों के प्रति सम्मान बंगाल की परंपरा का हिस्सा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सुझाव दिया कि माकपा अपने पार्टी कार्यालयों में पुस्तकालय बनाकर किताबें रखे। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक चर्चा हुई।

हालांकि, पुस्तक स्टालों पर हमलों के मामले में पार्टी नेताओं के बयानों में अंतर से यह जरूरत भी सामने आई कि ऐसे मुद्दों पर संगठन का रुख स्पष्ट हो और स्थानीय स्तर पर शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन प्रभावी कदम उठाए। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता दौरे और मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष के साथ बैठकों के बाद भी पार्टी के भीतर समन्वय को लेकर चर्चा जारी है।

रिपोर्ट के अनुसार, कालीघाट में अमित शाह के कार्यक्रम की जानकारी स्थानीय विधायक स्वपन दासगुप्त को पहले से नहीं थी। इन घटनाक्रमों के बीच भाजपा के सामने सरकार की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के साथ संगठन और सरकार के बीच संवाद तथा तालमेल को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है।