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बंगाल में नए सिरे से SIR कराने की मांग, बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने गिनाई वजहें

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:31 PM (IST)

बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की नई प्रक्रिया की मांग की है।

बंगाल भाजपा ने मतदाता सूची के नए SIR की मांग की।

बंगाल भाजपा ने मतदाता सूची के नए SIR की मांग की।

HighLights

  1. बंगाल भाजपा ने मतदाता सूची के नए SIR की मांग की।

  2. पिछली प्रक्रिया में हिंसा और बाधाओं का आरोप लगाया गया।

  3. मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव, विपक्षी विरोध को नकारा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल भाजपा के अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य शमिक भट्टाचार्य ने राज्य में नए सिरे से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) कराने की मांग करते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि पिछली प्रक्रिया के दौरान हिंसा हुई और उसमें बाधाएं डाली गईं।

एसआइआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर पिछले कई दिनों से चल रहे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए भट्टाचार्य ने दावा किया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए एसआइआर के दौरान लोगों से दस्तावेज छीनकर जला दिए गए, चुनाव अधिकारियों पर हमले किए गए और कार्यालयों में आग लगा दी गई।

विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाने के बजाय, चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से कराने के लिए उन्हें पुरस्कार देने पर विचार किया जाना चाहिए। भट्टाचार्य ने स्पष्ट कहा कि बंगाल में एसआइआर का एक और दौर जरूरी है, क्योंकि पिछली बार यह प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं हुई थी।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले हुए एसआइआर प्रक्रिया के दौरान प्रखंड विकास अधिकारियों (बीडीओ), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और भाजपा के बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) पर हमले किए गए। उनका निशाना तृणमूल की ओर से था।

सीजेपी के आंदोलन को जनता का समर्थन नहीं

एसआइआर के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जारी विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन उन्होंने इस आंदोलन के पीछे सक्रिय राजनीतिक ताकतों पर सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन को ऐसी राजनीतिक ताकतें चला रही हैं, जिन्हें मतदाताओं ने नकार दिया है और जिनका राजनीतिक महत्व नहीं रह गया है। उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन को जनता का समर्थन हासिल नहीं है।