राज्य ब्यूरो, कोलकाताः बंगाल में हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों से नाराज भाजपा के कई सीनियर नेताओं ने राज्य इकाई के आला अधिकारियों के खिलाफ मुखर होने लगे हैं। इनका दावा है कि पार्टी के लिए प्रतिबद्ध और पुराने समय के कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है और पार्टी में नए लोगों को अंधाधुंध बढ़ावा दिया जा रहा है। भाजपा की बंगाल अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने पार्टी में बढ़ते विवाद के बीच राज्य में दल के सभी मौजूदा विभागों और प्रकोष्ठों को भंग कर दिया है।

सितंबर में कार्यभार संभालने वाले मजूमदार ने 22 दिसंबर को नई राज्य समिति की घोषणा की थी। उपाध्यक्ष प्रताप बनर्जी और जय प्रकाश मजूमदार, महासचिव सायंतन बसु और अन्य जो पहले पार्टी के प्रमुख चेहरे रहे हैं, उन्हें संगठन में जगह नहीं मिली। हालांकि नई सूची के लिए मजूमदार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा है। राज्य भाजपा महासचिव (संगठन) और आरएसएस कार्यकर्ता अमिताभ चक्रवर्ती के खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की गई हैं।

भाजपा के एक सीनियर नेता ने कहा कि पार्टी जहां आज है, वहां तक पहुंचने के लिए जिन लोगों ने कड़ी मेहनत की, वे वर्षों से बंगाल में पार्टी का चेहरा थे। एक तरह की मंडली बनाने के लिए उनकी उपेक्षा की गई... हम सभी तब भी पीछे रहे, जब पार्टी ने विधानसभा चुनावों के दौरान दलबदलुओं को खुश करने के लिए हमारे टिकट रद करने का फैसला किया। हम पार्टी को तोड़ना नहीं चाहते हैं, लेकिन हम पार्टी को एक और गलती करने से रोकना चाहते हैं। दिलचस्प बात यह है कि राज्य इकाई विद्रोहियों की आलोचना नहीं करती है।

बंगाल इकाई के लिए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी के खिलाफ विद्रोह करने वालों ने संगठन के निर्माण के लिए काम किया, जब यह राज्य में कुछ भी नहीं था। पिछले महीने, भाजपा के कम से कम 10 विधायकों, ठाकुर और कई जिला नेताओं ने इसी मुद्दे पर अपना विरोध जताने के लिए पार्टी के वाट्सएप ग्रुप छोड़ दिए।

ये नेता हैं असंतुष्ट

असंतुष्ट नेताओं में मतुआ समुदाय के नेता और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर, एससी मतुआ-नमासुद्र समुदाय के विधायकों के अलावे पूर्व उपाध्यक्ष प्रताप बनर्जी, विश्वप्रिया राय चौधरी, रितेश तिवारी, जय प्रकाश मजूमदार और पूर्व महासचिव सचिव सायंतन बसु शामिल हैं।

Edited By: Vijay Kumar