कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल में अभी कोरोना वायरस का पीक आना बाकी है। वहीं दिल्ली में कोरोना की सेकंड वेव भी आ चुकी है। दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में जुलाई-अगस्त महीने में पीक आने के बावजूद मामलों की रफ्तार में कमी नहीं आई है। ये कुछ राज्यवार ट्रेंड हैं जो एक स्टडी में सामने आए हैं। ये स्टडी विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्रालय ने करवाई है। स्टडी करने वाली कमेटी का निष्कर्ष है कि भारत में बीते महीने कोविड-19 का पीक गुजर गया है।

इस स्टडी के मुताबिक देश में सर्वाधिक प्रभावित तकरीबन सभी राज्यों में कोरोना का पीक आ चुका है सिवाय बंगाल के। हालांकि स्टडी में यह भी चेताया गया है कि अगर कोरोना संबंधी सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया तो मामलों की संख्या दोबारा बढ़ सकती है।

पीक 17 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच था

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली, बंगाल, पंजाब, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों की स्टडी के बाद सामने आया है कि देश में कोरोना का पीक 17 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच था। दिल्ली, मध्य प्रदेश और पंजाब में दिसंबर के अंतर तक एक्टिव मामलों की संख्या एक हजार से कम हो सकती है। वहीं पश्चिम बंगाल को ज्यादा एहतियात की जरूरत है क्योंकि अभी यहां पीक आया ही नहीं है।

बंगाल में आ जाना चाहिए था पीक

स्टडी के मुताबिक बंगाल में अब तक पीक आ जाना चाहिए था और 4 अक्टूबर के बाद संख्या कम होनी चाहिए थीं। लेकिन वास्तविक आंकड़े कुछ और कह रहे हैं। गौरतलब है कि अभी पश्चिम बंगाल में बड़े धूम-धाम से मनाए जाने वाली दुर्गा पूजा के दौरान भी कई एहतियात बरतने के लिए कहा गया था। राज्य सरकार ने भी पांडाल लगाने की छूट दी थी लेकिन कोरोना संबंधी एहतियात बरतने के भी दिशानिर्देश जारी किए गए थे। 

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस