-तृणमूल समर्थित बुद्धिजीवियों ने साधा केंद्र पर निशाना

-कहा, आग से खेलने की कोशिश कर रहा केंद्र

-ममता से सीखने चाहिए सहिष्णुता, केंद्र में देनी होगी ममता को क्षमता

जागरण संवाददाता, कोलकाता :

असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के मसौदे के प्रकाशन को लेकर पश्चिम बंगाल में लगातार विरोध हो रहा है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के बाद अब तृणमूल समर्थक राज्य के बुद्धिजीवियों ने भी एनआरसी को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है और कहा है कि केंद्र सरकार आग से खेलने की कोशिश कर रही है। नाट्यकर्मी विभाष चक्रवर्ती ने कहा कि एनआरसी को लेकर केंद्र की भूमिका हिटलर से भी भयंकर है।

शुक्रवार को महानगर के प्रेस क्लब में बुद्धिजीवी वर्ग की ओर से एक प्रेस वार्ता की गई जिसमें विभाष चक्रवर्ती, शुभप्रसन्ना, अबुल बशर, सुबोध सरकार, जय गोस्वामी सरीखे बुद्धिजीवी शामिल हुए। नाट्यकर्मी विभाष चक्रवर्ती ने कहा कि केंद्र सरकार आग से खेल रही है। असम की तरह यदि बंगाल में एनआरसी लागू हुआ तो यह ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हमारे पास मतदाता पहचान पत्र है लेकिन संभव है कि बहुत दिन पुराने जन्म प्रमाण पत्र खोज कर भी नहीं मिल सके। उन्होंने कहा कि इसे लेकर डर का माहौल है। क्योंकि कुछ लोग बंगाल में भी एनआरसी लागू करने की मांग कर रहे हैं।

वहीं, इस मामले पर साहित्यकार अबुल बशद ने भाजपा पर हमला बोला और कहा कि मेरा नाम अबुल बशर है इसलिए क्या मुझे देश छोड़ना होगा? इस मामले में केंद्र को ममता बनर्जी से सीखना चाहिए कि किस तरह सहिष्णुता को कायम रखा जा सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रशंसा करते हुए कहा कि एनआरसी को लेकर ममता बनर्जी के रूख की प्रशंसा करनी चाहिए, ममता बनर्जी को ही देश चलाने का अधिकार देना होगा।

वहीं, एनआरसी को लेकर सुबोध सरकार ने कहा कि रातों रात सरकार भला इस तरह का निर्णय कैसे ले सकती है? उन्होंने ही तो इन लोगों को वोटर कार्ड, आधार कार्ड मुहैया कराया है फिर कैसे कहा जा रहा है कि आप यहां के नागरिक नहीं हैं? शिल्पकार शुभप्रसन्ना ने कहा कि कानूनी प्रमाणपत्र रहने के बावजूद भी क्यों नागरिकों को एनआरसी से बाहर रखा गया, इसका जवाब प्रशासन को देना चाहिए।

By Jagran