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बेस्वाद हुई पद्मा की धार, गुजरात से बांग्लादेश पहुंची सैकड़ों टन हिल्सा मछली

Published: Sat, 12 Sep 2026 11:25 PM (IST)Updated: Sun, 13 Sep 2026 12:03 AM (IST)

इस बार त्योहारों के मौसम में बांग्लादेश को अपनी हिल्सा की कमी के कारण भारत से लगभग 500 मीट्रिक टन हिल्सा मछली आयात करनी पड़ी है।

गुजरात से बांग्लादेश पहुंची सैकड़ों टन हिल्सा मछली।  (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

गुजरात से बांग्लादेश पहुंची सैकड़ों टन हिल्सा मछली। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. बांग्लादेश ने भारत से 500 मीट्रिक टन हिल्सा मछली आयात की।

  2. वैश्विक हिस्सेदारी के बावजूद बांग्लादेश में हिल्सा की भारी कमी।

  3. दुर्गा पूजा पर पद्मा हिल्सा की उपलब्धता पर अनिश्चितता के बादल।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। त्योहारों के मौसम में जिस हिल्सा मछली का इंतजार पूरे बंगाल को रहता है, इस बार उसकी पटकथा में एक अनोखा और अभूतपूर्व मोड़ आ गया है। इसे नियति का उलटफेर ही कहेंगे कि जिस बांग्लादेश की हिल्सा पूरी दुनिया में मशहूर है और जो हर साल भारत को दुर्गा पूजा के तोहफे के रूप में यह सौगात भेजता था, वह खुद इस बार भारत से हिल्सा आयात करने को मजबूर हुआ है।

वैश्विक उत्पादन में करीब 80 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाले बांग्लादेश में इस वर्ष हिल्सा की भारी कमी दर्ज की गई है। स्थानीय मांग पूरी करने और निर्यात बाजार को संभालने के लिए बांग्लादेशी व्यापारियों ने पिछले दो महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात (भरूच बंदरगाह) और बंगाल के हावड़ा थोक बाजार से लगभग 500 मीट्रिक टन हिल्सा का आयात किया है।

हावड़ा होलसेल फिश इंपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सैयद अनवर मसूद के अनुसार, भारत से आमतौर पर रोहू, बोआल और पारसे जैसी मछलियां बांग्लादेश भेजी जाती थीं, लेकिन हिल्सा का निर्यात पहली बार हुआ है।

बांग्लादेश के चटगांव और सिलहट क्षेत्रों में अंडे वाली हिल्सा की भारी मांग है, जो गुजरात के समुद्री तटों पर बहुतायत में मिलती है। बांग्लादेश न केवल इस मछली के अंडों को अलग से बेच रहा है, बल्कि इसे प्रसंस्कृत (प्रोसेस) करके विदेशों में निर्यात भी कर रहा है।

दूसरी ओर, इस घटनाक्रम ने भारतीय बंगालियों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इस दुर्गा पूजा पर उन्हें पद्मा की स्वाद-भरी हिल्सा का स्वाद नसीब होगा या नहीं। साल 2012 में तीस्ता जल समझौते के खटाई में पड़ने के बाद बांग्लादेश ने हिल्सा के औपचारिक निर्यात पर रोक लगा दी थी, हालांकि 2019 से वह पूजा उपहार के रूप में सीमित मात्रा में हिल्सा भारत भेजता रहा है।

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी नई सरकार ने इस बार निर्यात पर कड़ा रुख अपनाया है। हालांकि भारतीय व्यापारियों ने ढाका के मत्स्य विभाग से सीधे गुहार लगाई है, लेकिन पद्मा की हिल्सा भारतीय बाजारों तक कब पहुंचेगी, इस पर अभी भी अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं।