जागरण संवाददाता, कोलकाता : रंग, रुई, पेन या पेंसिल नहीं, बल्कि बागुईआटी में 90 लाख कील से मां दुर्गा का पंडाल तैयार हुआ है। कलाकृतियों को आकर्षित बनाने के लिए चम्मच, बाल्टी, बेलचा और कुप्पी का इस्तेमाल किया गया है। यह हैरतअंगेज कारनामा बापाई सेन नामक कारीगर ने किया है। बागुईआटी के बंधुमहल क्लब के पूजा पंडाल में समाज की अच्छाइयों और बुराइयों को प्रदर्शित करने की कोशिश की गई है। यहां नारी उत्पीड़न, डेंगू के प्रति जागरुकता, शराब विरोधी अभियान, प्रदूषण और सर्वधर्म समन्वय जैसे मुद्दों को दर्शाया गया है। पूजा कमेटी के अध्यक्ष पार्थ सरकार ने बताया कि इस बार पूजा पंडाल का थीम 'न कठिन न सख्त, निर्माण करें प्रदूषण मुक्त बंगाल' रखा गया है। समाज को जागरुक करने और संदेश देने के इरादे से ही कारीगर बापन मंडल की मदद से औरों से हटकर पूजा पंडाल का निर्माण किया गया है। पार्थ ने आगे कहा कि सरकार अकेले कानून बनाकर सभी समस्याओं को समाधान नहीं कर सकती है। इसमें जागरुकता सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है, इसीलिए कील की मदद से विभिन्न समस्याओं को तस्वीरों के जरिए प्रदर्शित करने का प्रयास किया है। वर्तमान में नारी उत्पीड़न समाज में सबसे बड़ी समस्या है। समाज को आगे ले जाने के लिए शिक्षा और शांति की भी सख्त जरुरत है। पूजा के दौरान प्रतिमा व पंडाल दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा होता है। इस तरह उन्हें जागरुक करने में आसानी होगी।

......

थीम पंडाल में पारंपरिक प्रतिमा

समाज को संदेश देने के लिए भले ही थीम पंडाल का निर्माण किया गया है, लेकिन प्रतिमा को पूरी तरह पारंपरिक अंदाज में बनाया गया है। पार्थ ने बताया कि स्थानीय लोगों की इच्छा का ध्यान रखते हुए पारंपरिक अंदाज में मां की प्रतिमा निर्मित की गई है। नए और पुराने के मेल से ही संस्कृति आगे बढ़ती है।

Posted By: Jagran