बंगाल में 'बाबरी मस्जिद' की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर फूट-फूटकर क्यों रो रहे? बोले राजनीति से लूंगा संन्यास
हुमायूं कबीर ने रेजीनगर उपचुनाव में हार स्वीकार करते हुए राजनीति से संन्यास और विधायक पद से इस्तीफे के संकेत दिए हैं।

हुमायूं कबीर फूट-फूटकर क्यों रो रहे।
HighLights
हुमायूं कबीर ने राजनीति से संन्यास और विधायक पद से इस्तीफे के संकेत दिए।
उन्होंने रेजीनगर उपचुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया।
मतदान के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, बाद में रिहा किया।
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल बाबरी मस्जिद की नीव रखने वाले नवादा से विधायक और आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने राजनीति से संन्यास और विधायक पद से इस्तीफे के संकेत दिए हैं। उन्होंने रेजीनगर उपचुनाव के रिजल्ट आने से पहले ही अपनी हार स्वीकार करते हुए पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
रेजीनगर उपचुनाव को लेकर हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट नहीं डालने दिया गया। साथ ही उन्होंने बडे़ पैमाने पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया।
फूट-फूट कर रोने लगे हुमायूं कबीर
मीडिया से बात करते हुए आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर फूट-फूट कर रोने लगे और बड़ा एलान करते हुए कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री रहेंगे, तब तक वह विधानसभा नहीं जाएंगे और इसके लिए वे क्षेत्र की जनता से माफी भी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के बाद जनता के बीच जाएंगे और अपने फैसले केो लिए मांफी मांगेंगे।
वोटिंग के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया
मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर मतदान के दौरान विधायक हुमायूं कबीर को पुलिस को धमकी देने और शांति व्यवस्था भंग करने के आरोपों में मंगलवार सुबह हिरासत में ले लिया गया था। हालांकि, करीब 12 घंटे बाद पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया।
हुमायूं कबीर ने पुलिस के खिलाफ खोला मोर्चा
मंगलवार सुबह मतदान करने के तुरंत बाद हुमायूं कबीर ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके आवास को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और वोटरों को डराने का काम हो रहा है। खुलेआम चुनौती देते हुए कबीर ने समर्थकों का आह्वान किया कि यदि पुलिस बाधा पहुंचाए तो वे हाथों में मुगदर लेकर सड़कों पर उतर आएं।
भड़काऊ आचरण के चलते हुमायूं कबीर पर एक्शन- पुलिस
जिले के पुलिस अधीक्षक के अनुसार, कबीर न तो चुनाव मैदान में प्रत्याशी हैं और न ही अधिकृत पोलिंग एजेंट, इसलिए मतदान प्रक्रिया के दौरान उनके इस तरह घूमने और भड़काऊ आचरण के चलते यह कानूनी कार्रवाई की गई है।
