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महुआ मोइत्रा को 24 घंटे में हटानी होगी मुख्य सचिव पर की गई विवादित पोस्ट

Published: Thu, 15 Oct 2026 08:51 PM (GMT+05:30)

कोलकाता के अलीपुर कोर्ट ने तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा को मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के खिलाफ की गई दो ...और पढ़ें

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HighLights

  1. अलीपुर कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को पोस्ट हटाने का दिया निर्देश।

  2. मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के खिलाफ की थी मानहानिकारक टिप्पणी।

  3. महुआ ने आदेश के खिलाफ आवेदन देने की बात कही।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता के अलीपुर कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी गुट) की कृष्णानगर लोकसभा सीट की सांसद महुआ मोइत्रा को बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के खिलाफ की गई दो विवादित इंटरनेट मीडिया पोस्ट 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है।

ये पोस्ट तीन और छह अक्टूबर को की गई थीं। कोर्ट ने महुआ को मुख्य सचिव के खिलाफ मानहानिकारक टिप्पणी वाली नई पोस्ट करने या इस मामले से जुड़ी पुरानी पोस्ट दोबारा साझा करने से भी रोक दिया है।

10 करोड़ के हर्जाने की मांग

मनोज कुमार अग्रवाल ने राज्य के तत्कालीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया में उनकी भूमिका को लेकर महुआ की टिप्पणियों पर पहले कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बाद उन्होंने 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया।

महुआ ने कहा था वोट चोर

महुआ ने इंटरनेट मीडिया पोस्ट में अग्रवाल को 'वोट चोर' कहा था। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि महुआ की पोस्ट में एसआइआर प्रक्रिया की आलोचना के साथ तत्कालीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी पर अवैध कार्य करने के आरोप भी लगाए गए थे। कोर्ट के अनुसार, महुआ इन गंभीर आरोपों के समर्थन में उपयुक्त साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं। ऐसे में आरोपों के कानूनी आधार पर संदेह पैदा होता है।

महुआ ने आदेश के खिलाफ आवेदन देने की बात कही

कोर्ट ने कहा कि जनहित में एसआइआर प्रक्रिया पर चर्चा और उसकी आलोचना करने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके बहाने किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ मानहानिकारक टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं है।

महुआ ने सोशल मीडिया पर दी प्रतिक्रिया

महुआ को नोटिस देकर यह बताने का अवसर भी दिया जाएगा कि उनके खिलाफ टिप्पणियों पर रोक का आदेश बरकरार क्यों नहीं रखा जाए। कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ ने इंटरनेट मीडिया पर कहा कि वह रोक हटाने के लिए आवेदन दाखिल करेंगी, ताकि 'वोट चोर' को 'वोट चोर' कहने के अपने अधिकार को बरकरार रख सकें।