राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी बाकी नगर निकायों के चुनाव अदालत की छत्रछाया में चाहते हैं। कांग्रेस कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के चुनाव में व्यापक तौर पर हिंसा व धांधली का आरोप लगा चुकी है। अधीर ने कहा-'हम भाजपा की तरह केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग नहीं कर रहे। हम चाहते हैं कि लोगों का मताधिकार सुनिश्चित करने के लिए अदालत की छत्र-छाया में बाकी नगर निकायों के चुनाव हों।

अधीर ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्य चुनाव आयोग पर उन्हें रत्ती भर भी विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा-'राज्य चुनाव आयोग तृणमूल की शाखा के रूप में काम कर रहा है। केएमसी चुनाव में यह साफ तौर पर दिख चुका है। अभी जिस तरह के हालात हैं, उसमें पार्टी दो ही चीज कर सकती है-या तो चुनाव लड़े या फिर इसका बहिष्कार करे। आगे क्या करना है, यह पार्टी के स्थानीय नेतृत्वों से बातचीत करके ही तय किया जाएगा।

बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा-'केएमसी चुनाव में कांग्रेस ने दो वार्ड जीते हैं जबकि छह वार्ड में पार्टी को 25 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले हैं। गौरतलब है कि राज्य चुनाव आयोग की तरफ से कलकत्ता हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा गया है कि आगामी 22 जनवरी को बाकी नगर निगमों व 27 जनवरी को नगरपालिकाओं के चुनाव होंगे।

दूसरी तरफ राज्य के उद्योग मंत्री व तृणमूल कांग्रेस के राज्य महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि इतने दिनों तक विरोधी दल केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग कर रहे थे और अब कुछ और राग अलाप रहे हैं। वे दरअसल समझ नहीं पा रहे हैं कि जनता का उनसे भरोसा उठ गया है।

कांग्रेस ने मानवाधिकार आयोग को लिखा पत्र, ममता खिलाफ कार्रवाई की मांग

मालूम हो कि बंगाल में कांग्रेस की युवा शाखा ने शुक्रवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर कोलकाता नगर निगम (केएमसी) चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ कथित तौर पर हुई हिंसा के लिए बंगाल की मुख्यमंत्री और कोलकाता के पुलिस आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। भारतीय युवा कांग्रेस (आइवाइसी) ने शिकायत में कहा है कि 19 दिसंबर को कोलकाता नगर निगम चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जब कांग्रेस उम्मीदवारों की पिटाई की, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पुलिस आयुक्त ने कुछ नहीं किया। आइवाइसी के राष्ट्रीय सचिव ने दावा किया कि कांग्रेस के एक कार्यकर्ता के सबके सामने कपड़े उतारे गए और बेरहमी से उसकी पिटाई की गई। पार्टी के एक अन्य उम्मीदवार को कई पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पीटा गया। आइवाइसी ने अपनी शिकायत पत्र में कहा है कि व्यापक पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ, लेकिन पुलिस और राज्य प्रशासन वहां खड़ा रहा और कुछ नहीं किया। साथ ही, दावा किया कि कुछ स्थानों पर तो उन्होंने गुंडों की मदद की।

Edited By: Priti Jha