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बंगाल में शरणार्थियों की जमीन पर कब्जा: अभिषेक के निजी सहायक को भेजे जाते थे रुपये; चार्जशीट में सीआईडी का दावा

Published: Sun, 13 Sep 2026 07:40 PM (IST)

पश्चिम मेदिनीपुर जमीन घोटाले की जांच में सीआईडी ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अभिषेक के निजी सहायक पर सीआईडी का दावा।

अभिषेक के निजी सहायक पर सीआईडी का दावा।

HighLights

  1. सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय पर आरोप लगाए।

  2. शरणार्थियों की जमीन घोटाले से मिले रुपये सुमित तक पहुंचाए गए।

  3. सुमित के बैंक खाते में 7 करोड़ रुपये का स्रोत अज्ञात।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी में जमीन घोटाले की जांच में सीआईडी ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय को लेकर गंभीर दावे किए हैं।

दाखिल चार्जशीट में जांच एजेंसी ने कहा है कि शरणार्थियों के लिए आवंटित सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसकी धोखाधड़ी से बिक्री की गई। इस लेनदेन से मिले रुपये का एक बड़ा हिस्सा सुमित तक पहुंचाया जाता था। सीआईडी के अनुसार, इस संबंध में अभिषेक के दो पूर्व सुरक्षाकर्मियों समेत 20 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।

चार्जशीट के अनुसार, पूर्व विधायक सुजय हाजरा, अनितेश पायरा और उनके सहयोगियों ने शरणार्थियों की खेती के लिए आवंटित जमीन पर कब्जा किया था। सीआईडी का दावा है कि यह काम सुजय और सुमित के निर्देश पर हुआ। जमीन की धोखाधड़ी से मिली रकम का एक हिस्सा सुजय सुमित के कार्यालय में भेजते थे। सुजय को सीआईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, सुजय के लिए काम करने वाले दो बिचौलियों देबाशीष दे और सुब्रत हाजरा ने भी सुमित को रुपये भेजे जाने की बात स्वीकार की है। सैयदपुर गांव के दो निवासियों ने भी सुजय और सुमित के बीच वित्तीय लेनदेन की जानकारी दी है। सीआईडी ने दावा किया है कि अभिषेक के दो पूर्व सुरक्षाकर्मियों ने सुमित को जमीन धोखाधड़ी के पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार बताया है।

सुमित के खाते में सात करोड़ रुपये जमा

सीआईडी को जमीन के दस्तावेजों में दर्ज कई विक्रेताओं के अस्तित्व पर भी संदेह है। जांच में कई विक्रेता दिए गए पते पर नहीं मिले और स्थानीय लोगों ने भी उन्हें पहचानने से इन्कार किया। एजेंसी को आशंका है कि दस्तावेजों में काल्पनिक नाम और पते का इस्तेमाल किया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि 2021 के बाद उन्हें जबरन जमीन से हटाया गया।

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि 2018 से 2021 के बीच सुमित के एक सरकारी बैंक खाते में कुल सात करोड़ रुपये जमा हुए। पूछताछ में वह इस रकम के स्रोत की जानकारी नहीं दे सके। सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम सुरक्षा जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप के बाद रद हुई थी। इसके बाद सीआईडी ने अभिषेक के कालीघाट स्थित आवास से सुमित को गिरफ्तार किया। फिलहाल वह सीआईडी हिरासत में हैं।