बीमारी ने छीनी पत्नी की मुस्कान, तो 88 साल के शिक्षक ने मूर्ति में सहेजीं यादें
88 वर्षीय शिक्षक भूपतिरंजन देवनाथ ने अपनी बीमार पत्नी अंजलि की खोई हुई मुस्कान को मिट्टी की मूर्ति में जीवंत कर दिया है।

भूपतिरंजन देवनाथ ने बीमार पत्नी अंजलि की मूर्ति बनाई

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके के 88 वर्षीय शिक्षक भूपतिरंजन देवनाथ ने अपनी बीमार पत्नी अंजलि की वह मुस्कान मिट्टी की मूर्ति में हमेशा के लिए सहेज दी है, जो अब उसके चेहरे पर दिखाई नहीं देती। करीब 60 वर्ष के दांपत्य जीवन में अंजलि के मुस्कुराने पर उनके होंठों के दोनों ओर छोटे-छोटे गड्ढे (डिंपल) पड़ते थे।
बीमारी ने पत्नी को लंबे समय से बिस्तर पर ला दिया, लेकिन भूपतिरंजन के मन में उसकी वही मुस्कुराती छवि आज भी जिंदा है। इसी याद को कायम रखने के लिए उन्होंने पत्नी की मुस्कुराती प्रतिमा बनाई है।
भूपतिरंजन देवनाथ ने बीमार पत्नी अंजलि की मूर्ति बनाई
मध्यमग्राम हाई स्कूल में लंबे समय तक शिक्षक रहे भूपतिरंजन चार दशक से अधिक समय से कला साधना भी कर रहे हैं। मिट्टी, नारियल, पेड़ की टहनियों और घरेलू वस्तुओं से उन्होंने अनेक कलाकृतियां और प्रतिमाएं बनाई हैं।
चित्रकला में भी उनकी रुचि है। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर, उस्ताद बड़े गुलाम अली खान, उस्ताद अलाउद्दीन खान और मन्ना दे जैसे प्रसिद्ध लोगों के चित्र भी बनाए हैं। भूपतिरंजन कहते हैं कि बिस्तर पर पड़ी पत्नी को देखना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है।
शिक्षक ने अपनी कला से पत्नी की मुस्कान को अमर किया
उसकी मुस्कान बीमारी ने छीन ली है इसलिए उन्होंने उसके मुस्कुराते चेहरे को मूर्ति में जीवित करने की कोशिश की। उन दोनों के वैवाहिक जीवन में सुख-दुख के कई पड़ाव आए।
कोरोना काल में उन्होंने अपने बेटे को खो दिया। बहू और पोते-पोतियां उनके साथ रहते हैं। दो बेटियों की शादी भी उन्होंने की। फिलहाल आर्थिक परेशानी है। पेंशन के सहारे किसी तरह घर चल रहा है। तमाम तकलीफों के बावजूद भूपतिरंजन व अंजलि का 60 साल का प्यार अभी भी तरोताजा है।
