राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोरोना संकट के बीच अब बंगाल में पावरोटी की कीमत बढ़ने जा रही है। 30 जनवरी से प्रति पाउंड (400 ग्राम) पावरोटी में चार रुपये तक की बढ़ोत्तरी हो रही है। बेकरी व्यवसायियों के संगठनों ने शनिवार को यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। वेस्ट बंगाल बेकर्स एसोसिएशन, इंडियन बिस्कुट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, आल इंडिया बेकर्स एंड बिस्कुट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और दि वेस्ट बंगाल बेकर्स बिस्कुट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का संयुक्त संगठन दि ज्वाइंट एक्शन कमेटी की ओर से पावरोटी की कीमत में बढ़ोत्तरी की घोषणा की है।

पश्चिम बंगाल बेकरी मालिकों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सचिव व भगवानगोला के विधायक इदरीश अली ने बताया कि 30 जनवरी से साधारणतः 400 ग्राम (प्लेन व स्लाइस) पावरोटी की कीमत 28 रुपये, 200 ग्राम (प्लेन व स्लाइस) पावरोटी की कीमत 14 रुपये, 100 ग्राम (प्लेन) पावरोटी चार पीस 30 रुपये खुदरा कीमत में मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि आम जनता व गरीबों को कोई असुविधा न हो और साथ ही बेकरी उद्योग भी बच सके, यह सोचकर पावरोटी की कीमत में इजाफा किया जा रहा है। 

सामाजिक सुरक्षा योजना चलाने को विश्वबैंक से एक हजार करोड़ रुपये ऋण ले रहा बंगाल

विश्व बैंक ने बंगाल सरकार को एकीकृत सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के लिए 12.5 मिलियन (लगभग 1,000 करोड़ रुपये) ऋण देने का निर्णय लिया है। इस फैसले की घोषणा हाल ही में विश्व बैंक ने राज्य सरकार को लिखे एक पत्र में की है। जानकारों का मानना है कि कन्याश्री, स्वास्थ्य साथी जैसे राज्य सरकार के विकास कार्यक्रमों के लिए यह राशि दी गई है। पहली तृणमूल सरकार के बाद से राज्य ने महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक के बाद एक परियोजनाएं शुरू की हैं। सरकार का दावा है कि, विधवा भत्ता, वृद्धा भत्ता, कन्याश्री, रूपश्री, स्वास्थ्य साथी और अब लक्ष्मी भंडार योजना महिला सशक्तीकरण की दिशा में सहायक परियोजनाएं हैं।

महिलाओं की आय सुनिश्चित करना जितना संभव होगा, यह महिलाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार, बाल विवाह को रोकने या समग्र रूप से अर्थव्यवस्था को संगठित करने में भी सहायक भूमिका निभाएगा। विधानसभा चुनाव की लड़ाई जीतकर तीसरी बार सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सामाजिक क्षेत्र में आवंटन बढ़ाने का संदेश दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि अनावश्यक लागतों को बचाकर या नई परियोजनाओं की योजना को सख्त बनाकर अन्य क्षेत्रों में सामाजिक परियोजनाओं को अंजाम दिया जाएगा। उस समय, ऋण आवेदन विश्व बैंक को प्रस्तुत किया गया था। उस समय, विश्व बैंक ने विधवाओं, विशेष रूप से सक्षम महिलाओं के लिए सामाजिक सशक्तिकरण परियोजनाओं और कन्याश्री और रूपश्री जैसी महिला सशक्तीकरण परियोजनाओं में बंगाल सरकार की भूमिका की भी प्रशंसा की।

अगस्त में, राज्य को विश्व बैंक की ओर से उधार देने पर विचार करने के लिए कहा गया था। इस बार राज्य को पत्र आया है। बताते चलें कि राज्य सरकार की आर्थिक स्थित ऐसी है कि सरकारी कर्मचारियों को वेतन और पेंशन देने के लिए भी ऋण लेना पड़ता है और अब तक बंगाल  चार लाख करोड़ से अधिक ऋण ले चुका है।

Edited By: Priti Jha