कोलकाता, स्टेट ब्यूरो। West Bengal By Elections 2021 बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है। नंदीग्राम में हार के बाद उन्हें अपनी मुख्यमंत्री का पद बचाने के लिए यह उपचुनाव लड़ना पर रहा है। यही नहीं उनका पिछले चुनाव में विजयी तृणमूल प्रत्याशी शोभनदेव चटर्जी से अधिक अंतर से जितने का लक्ष्य है। यही वजह है कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में हर दिन चुनाव प्रचार के लिए पूरी ताकत लगा रखी थीं। अपने मंत्रिमंडल के आधे से अधिक मंत्रियों भी उतार रखा था। तृणमूल महासचिव व ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी चुनाव प्रचार करते दिखे। शोभनदेव ने 28,719 मतों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी रूद्रनील घोष को पराजित किया था।

अभिषेक बनर्जी ने दावा किया है कि भाजपा प्रत्याशी प्रियंका टिबड़ेवाल की जमानत जब्त हो जाएगी और ममता बनर्जी एक लाख से अधिक मतों से विजयी होंगी। परंतु भाजपा भी एक ईंच जमीन नहीं छोड़ रही है। भाजपा के लिए अपना पिछले चुनाव में प्राप्त 35.16 फीसद मत को बरकरार रखने की चुनौती है। यही वजह रही कि सोमवार को हाई प्रोफाइल सीट भवानीपुर में चुनाव प्रचार का आखिरी दिन सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी थी, जिसका नतीजा भाजपा के साथ झड़प भी रही।

अंतिम दिन भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के जिन आठ वार्डो में अपने 80 नेताओं को प्रचार के लिए उतारा था। वहीं तृणमूल ने भी दर्जनों नेताओं व मंत्रियों को हर मुहल्ले में प्रचार के लिए उतार रखा था। 30 सितंबर को कड़ी सुरक्षा में मतदान होना है। अब देखने वाली बात होगी चुनावी हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल में उस दिन भवानीपुर में क्या होता है? ममता बनर्जी इस सीट से दो बार निर्वाचित हुई थीं। 2011 में उपुचनाव में ममता ने माकपा प्रत्याशी को 54,213 मतों से पराजित क्या था। इसके बाद 2016 विधानसभा में ममता 25,301 वोटों से विजयी हुई थीं। परंतु 2021 में वह अपनी सीट छोड़कर नंदीग्राम चली गईं और वहां भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से 1956 मतों के अंतर से हार गईं।

इस सीट से शोभनदेव लड़े और वे 28 हजार से अधिक मतों से विजयी हुए और ममता के लिए उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। अब देखने वाली बात होगी कि तीन अक्टूबर को जब मतगणना होगी तो नतीजा क्या रहता है? ममता ने चुनाव प्रचार के दौरान लोगों से कहा था कि अगर वोट नहीं पड़े तो मैं सीएम की कुर्सी पर नहीं रह पाऊंगी। इसी से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सिर्फ चुनाव नहीं प्रतिष्ठा की भी लड़ाई है।

Edited By: Sanjay Pokhriyal