कोलकाता, राज्य ब्यूरो। उत्तर 24 परगना जिले के इच्छापुर के कोरोना संक्रमित एक किशोर को स्वजन तीन अस्पतालों में भर्ती के लिए घूमना पड़ा और जब भर्ती किया गया तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इसके दो दिन बाद ही दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर का एक युवक की हाल एेसा ही हुआ है। फिर से कोरोना लक्षणों वाले एक युवक की समय पर उपचार नहीं होने के कारण मृत्यु हो गई। राज्य के प्रतिष्ठित अस्पतालों में से एक कोलकाता मेडिकल कॉलेज के फर्श पर सोमवार को उसकी मौत हो गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बार-बार निर्देश दिया है कि किसी भी मरीज को बिना उपचार नहीं लौटाया जा सकता, कम से कम प्राथमिक चिकित्सा दी जानी चाहिए। लेकिन सीएम जो राज्य की स्वास्थ्य मंत्री भी है, उनके आदेश का दूर दराज तो छोड़ दें, कोलकाता के अस्पतालों में कितना पालन हो रहा है उसकी यह वानगी है।

पता चला है कि अशोक नामक उस युवक की तबीयत जून के आखिरी सप्ताह से खराब थी। उसे बार-बार उल्टी हो जा रही थी। बाद में दक्षिण बारासात के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां टायफाइड का इलाज किया जा रहा था। बुखार के साथ उसे रविवार से सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई। डॉक्टरों ने कहा कि मरीज में कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं। स्वजनों को तत्काल कोरोना अस्पताल ले जाने को कहा गया। मरीज को सोमवार सुबह एम्बुलेंस से पहले एसएसकेएम अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया।

वहां बताया जाता है कि वर्तमान में एसएसकेएम में बुखार का क्लिनिक आउटडोर में चल रहा है। मरीज को तुरंत वहां पहुंचने के लिए कहा गया। इस बीच एम्बुलेंस में अॉक्सीजन नहीं होने की वजह से युवक की तबीयत काफी खराब हो चुकी थी। एसएसकेएम के डॉक्टरों ने मरीज को देखा और उसे बताया कि उसकी हालत गंभीर है और उसे तुरंत भर्ती करना होगा। चिकित्सकों ने उसे तत्काल कोरोना अस्पताल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में उसकी एक बार फिर से जांच की गई लेकिन समय लग गया और 26 वर्षीय युवक ने दम तोड़ दिया। स्वजनों का कहना है कि एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भेजा गया। अगर एसएसकेएम में मेरे बेटे को अॉक्सीजन दी जाती तो शायद वह नहीं मरता। 

Posted By: Preeti jha

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