मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

-अस्पताल प्रबंधन पर लगा

लापरवाही का आरोप

-भवानीपुर थाने में मामला दर्ज, जांच में जुटी पुलिस

जागरण संवाददाता, कोलकाता : एसएसकेएम अस्पताल के एनेस्थेसिया विभाग में वार्ड बॉय संग जांच को गए मरीज के लापता होने के बाद परिजनों ने उक्त मामले की लिखित शिकायत भवानीपुर थाने में दर्ज कराई है। इधर, मरीज के लापता होने के बाद उसकी खोज में जुटे परिजनों ने जब अस्पताल प्रबंधन से मरीज की जानकारी चाही तो उन्हें बताया गया कि मरीज को एमआरआइ के लिए ले जाया गया है, लेकिन लगातार समय बीतने के बाद भी जब मरीज वार्ड में नहीं लौटा तो आखिरकार परेशान परिजनों ने उक्त मामले की भावनीपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज की। मिली जानकारी के मुताबिक 60 वर्षीय एगरा निवासी खगेंद्रनाथ माइती को ट्यूमर की शिकायत के बाद परिजनों ने उन्हें मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल रेफर कर दिया। बाद में जांच के दौरान पता चला कि उनका ट्यूमर कैंसर में तब्दील हो गया है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो बीते छह अगस्त को उन्हें यहां भर्ती कराया गया था और नौ अगस्त को दोपहर के दौरान खगेंद्रनाथ को एनेस्थेसिया विभाग में जांच के लिए ले जाया गया था और तभी से वे लापता हैं। बताया गया कि आठ अगस्त तक मरीज के भाई नागेंद्रनाथ उनके साथ थे और उसी रात को मरीज के लिए एक अटेंडेंट रखा गया। अगले दिन सुबह नौ बजे ड्यूटी खत्म होने के बाद अटेंडेंट चला गया। इस दौरान दोपहर दो बजे के करीब मरीज का भतीजा उन्हें देखने अस्पताल पहुंचा, लेकिन वार्ड में मरीज को न देखने की सूरत में उसने मौके पर तैनात स्वार्थ कर्मियों से जब मरीज के बारे में पूछा तो उसे बताया गया मरीज को एमआरआइ के लिए ले जाया गया है। हालांकि काफी देर होने के बाद भी जब मरीज नहीं लौटा तो उसने वार्ड में ऑन ड्यूटी सिस्टर इंचार्ज से इसके बारे में पूछा। खैर, उसने भी एक ही जवाब दिया कि मरीज को एमआरआइ के लिए ले जाया गया है। लेकिन हैरत की बात यह थी उसे भी नहीं पता था आखिरकार मरीज को लेकर कौन गया था? वहीं नौ अगस्त को थाने में शिकायत के बाद अगले दिन दस अगस्त को मौके पर पहुंची पुलिस ने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे की पड़ताल की तो मरीज को बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस के गेट से बाहर निकलते देखा गया। इस दौरान उसके हाथ में अस्पताल की रिपोर्ट थी और वह सुरक्षा गार्ड से बात करता नजर आया। इधर, मरीज के रिश्तेदार दुर्गाशीष जाना ने कहा कि खगेंद्र वार्ड में जाने को सुरक्षाकर्मी से बात कर रहे थे, लेकिन उड़िया बोलने के कारण उनकी बातें मौके पर तैनात सुरक्षाकर्मी समझ नहीं सका। हालांकि उन्होंने वार्ड बॉय पर लापरवाही का आरोप लगाए हुए कहा कि इस पूरे मामले में वार्ड बॉय दोषी है, क्योंकि उसकी ड्यूटी थी वह मरीज को वार्ड तक पहुंचाए, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। वहीं इस मामले पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक रघुनाथ मिश्रा ने प्रतिक्रिया देने से इन्कार कर दिया।

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Posted By: Jagran

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