-जनसंपर्क अभियान के तहत पहुंचने वाले नेताओं से लोग पूछ रहे हैं सवाल

-सीएम का 1,000 से अधिक नेताओं को 10,000 गांवों में पहुंचने का निर्देश जागरण संवाददाता, कोलकाता : तृणमूल प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देशानुसार पार्टी के नेता और मंत्री जनसंपर्क अभियान में जुटे हुए हैं। हालांकि कई नेताओं को कट मनी (वसूली) और स्थानीय नेतृत्व के अहंकार पर जनता के सवालों का जवाब देते नहीं बन रहा है। खुद पार्टी के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी है।

यहां बता दें कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी कंपनी 'इंडियन पॉलीटिकल एक्शन कमेटी'(आईपीएसी) की सलाह पर 29 जुलाई को तृणमूल प्रमुख ने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 1,000 से अधिक नेताओं को अगले 100 दिनों में 10,000 गांवों की यात्रा करने और जनता की समस्याओं को सुनने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि इस दौरान नेता स्थानीय लोगों के साथ वक्त बिताएंगे और उनकी शिकायतों का निवारण करेंगे। मुख्यमंत्री ने लोगों से सीधे संपर्क स्थापित करने के लिए टोल फ्री नंबर और वेबसाइट का भी शुभारंभ किया।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक सीटें नहीं जीतने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने प्रशांत किशोर और आइपीएसी की सेवा लेने का फैसला किया था। तृणमूल काग्रेस के एक नेता ने कहा कि कुछ लोग खुश हैं, लेकिन ऐसे भी लोग हैं जो कट मनी व स्थानीय नेताओं के अहंकार एवं बदसलूकी तथा उनके खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर हमसे सवाल कर रहे हैं। इन सवालों का जवाब देने में हमें मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

बता दें कि उक्त निर्देश के बाद पार्टी के कई नेता, मंत्रियों को जनता के बीच समय बीताते देखा गया है। इनमें रवींद्रनाथ घोष, ज्योतिप्रिय मल्लिक, अब्दुल रज्जाक मोल्ला, फिरहाद हकीम, पार्थ चटर्जी जैसे नेताओं का नाम शामिल है।

वहीं, पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि कई सारे लोगों ने हमसे पूछा कि हम भ्रष्ट और अहंकारी नेताओं को पार्टी से निकाल बाहर करने में क्यों हिचक रहे हैं? हम अपने अवलोकन को पार्टी नेतृत्व से साझा करेंगे।

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Posted By: Jagran