जागरण संवाददाता, कोलकाता : नेताजीनगर दंपती हत्याकांड की जांच में जुटे कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग के अधिकारी फिंगर प्रिंट के सहारे हत्यारों तक पहुंचने की जुगत में हैं। इस मामले में अब तक संदेह के घेरे में आए 25 लोगों से मैराथन पूछताछ हो चुकी है। पहली दफा हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने 3डी मॉडलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया है। गौरतलब है कि 30 जुलाई की सुबह नेताजीनगर के 248, एनएससी बोस रोड के अंतर्गत 50ए, अशोक एवेन्यू स्थित एक पुराने मकान में दिलीप मुखर्जी (80) की लाश कमरे जबकि सपना मुखर्जी (72) की लाश सीढ़ी के पास पड़ी मिली थी। दिलीप का मुंह तकिये से जबकि सपना का गला रस्सी से दबाया गया था। पुलिस को घर से कुछ नगदी, मोबाइल व एक सिम गायब मिला था। पुलिस ने अलमारी से ढाई लाख से अधिक की नगदी व जेवरात और 30 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपाजिट के कागजात बरामद किए थे। वर्तमान व पूर्व नौकरानियों ने कई प्रमोटरों द्वारा दंपती पर मकान बेचने का दबाव डालने एवं धमकी देने की बात कही थी। दोहरे हत्याकांड की जांच में जुटी पुलिस ने नेताजीनगर में तीन अलग-अलग स्थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों के 6 घंटे के वीडियो फुटेज को जांचा तो एक व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध नजर आई। उसे दंपती के मकान के बाहर कई मर्तबा घूमता देखा गया। जांच में जुटी लालबाजार के खुफिया विभाग के अधिकारियों को घटनास्थल से दंपती के अलावा अन्य व्यक्ति के फिंगर प्रिंट भी मिले थे। इसके बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर नौकरानी समेत 25 लोगों से मैराथन पूछताछ की। साथ ही उनके फिंगर प्रिंट भी लिए गए, जिन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया ताकि पुराने फिंगर प्रिंट से उनका मिलान किया जा सके। पुलिस ने पहली बार हत्याकांड की जांच में अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया। इसके तहत 3डी मॉडलिंग सिस्टम के जरिए मृत दंपती, घटनास्थल और पूछताछ के दौरान संदिग्धों के फोटो लिए गए। पुलिस को उम्मीद है कि फिंगर प्रिंट ही हत्यारों तक पहुंचाने में मददगार साबित होंगे।

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Posted By: Jagran