जागरण ब्यूरो, कोलकाता: रसोई गैस सब्सिडी को आधार कार्ड से जोड़ने के केंद्र सरकार के निर्णय के विरुद्ध सोमवार को विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया। संसदीय कार्यमंत्री पार्थ चटर्जी ने सदन में प्रस्ताव पेश किया। जिसे सत्ता व विपक्ष एक सुर में ध्वनिमत से पारित कर दिया। मुख्य विपक्षी वाममोर्चा की ओर से सुझाए गए संशोध को सत्तापक्ष ने मानते हुए प्रस्ताव लाया था। इसीलिए कांग्रेस को छोड़ कर अन्य विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया। शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में हुई पार्टी के विधायक दल की बैठक में आधार कार्ड पर केंद्र सरकार के निर्णय के विरुद्ध प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया गया था।

चटर्जी ने कहा कि रसोई गैस के ग्राहकों को सब्सिडी राशि सुनिश्चित करने को ध्यान में रख कर प्रस्ताव का प्रारुप तैयार किया गया था। रसोई गैस के ग्राहकों को सब्सिडी की राशि पाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने के केंद्र के निर्णय से बंगाल सरकार सहमत नहीं है। आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट की भी राय है। आम जनता की सुविधा व सर्वोच्च न्यायालय के मत सभी को ध्यान में रख कर प्रस्ताव का प्रारूप तैयार किया गया था। साथ ही विपक्षी दलों की ओर से भी कुछ संशोधन सुझाए गए थे जिसे भी शामिल किया गया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही इसका विरोध किया था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप की मांग की थी।आधार बनाया जाएगा।

विरोधी दल के नेता सूर्यकांत मिश्रा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार के अधीन सात मंत्रालय के 25-26 योजनाओं का लाभ आधार कार्ड के आधार पर लोगों को देना सुनिश्चित हुआ है जबकि राज्य में आधार कार्ड धारकों की संख्या महज 10 फीसद नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वाममोर्चा शुरू से विरोध करता रहा है। हमलोगों ने विधानसभा में सरकार की ओर से लाए गए प्रस्ताव में संशोधन करने को कहा था जिसे सरकार ने मान लिया यह अच्छी बात है। हालांकि, एक संशोधन सरकार की ओर से नहीं माना गया। खैर, यह विवाद का मुद्दा नहीं है।

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