संवाद सूत्र, झाड़ग्राम : इन दिनों महिलाओं व बच्चियों के साथ कई जगहों पर हो रहे अत्याचार की घटना जहां खूब सुर्खियां बटोर रही है, वहीं झाड़ग्राम जिले में निर्दयता की पराकाष्ठा को पार करते हुए एक दंपती ने खुद ही अपनी तीन वर्षीय मानसिक रूप से बीमार बेटी को जंगल में छोड़ दिया। आरोपितों में मां अन्नपूर्णा पात्र तथा पिता सुधांशु पात्र है। यह दंपती ओडिशा जिला मयूरभंज का निवासी है। यह दंपती अपनी बेटी को लेकर बुधवार को सुबह करीब 11 बजे मानिकपाड़ा पुलिस चौकी अंतर्गत बामुनमारा जंगल में पहुंचा। जहां बेटी को अकेला छोड़कर ये लोग तेजी से जंगल से भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन कुछ ग्रामीणों की नजर इन पर पड़ी। जिसके बाद ग्रामीणों ने दौड़ाकर इन लोगों को पकड़ लिया। कड़ाई से पूछताछ कर भागने का कारण पूछने पर दंपती ने सच उगल दिया। इससे वहां मौजूद ग्रामीणों के होश फाख्ता हो गए। लोगों ने जंगल में जाकर कन्या को बरामद करने के साथ ही इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर आकर बच्ची को अपने संरक्षण में ले लिया। इसके साथ ही आरोपित दंपती को हिरासत में लेकर इन्हें बेटी को जंगल में छोड़ने का कारण भी पुलिस तलाश रही है। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार राठौड़ ने कहा कि दंपती द्वारा अपनी बेटी को अकेला जंगल में छोड़ कर भागने की घटना की जानकारी मिली है। मामले की पूरी तफ्तीश पुलिस कर रही है। इधर ग्रामीणों का कहना है कि दंपती पर यदि हमलोगों की नजर न पड़ती, तो बच्ची की जान खतरे में पड़ जाती। उसका किसी सिरफिरे इंसान या जंगली जानवर का निवाला बनना तय था। दैवीय संयोग से बच्ची बाल - बाल बच गई।

Posted By: Jagran

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