संवाद सूत्र, नागराकाटा: असमांजस्य के कारण चाय उद्योग में समस्याएं आ रही है। इस कारण उत्पादन से लेकर चाय की बिक्री भी प्रभावित हो रही है। श्रमिकों की आकांक्षा और श्रमिकों की उम्मीदें बढ़ गई है। वर्तमान समय में उत्तर बंगाल के बड़े चाय उद्योग काफी संकट में है। चाय उद्योग को बचाने के लिए खुदरा चाय बागानों को आगे आना होगा। उक्त बातें शनिवार को टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टाई) के 49 वें वार्षिक सम्मेलन में उठकर आई है। नागरकाटा के यूरोपियन प्लानटर्स क्लब के उत्तर बंगाल शाखा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर टी बोर्ड सिलीगुड़ी के उप निदेशक रमेश कुजूर मौजूद थे।

तथ्यों की माने तो वर्तमान समय में सिलीगुड़ी चाय निलाम केंद्र में 2019 में कुल 80 किलो चाय की बिक्री 150 रुपये प्रति किलो की दर से हुई है। केवल 20 प्रतिशत चाय को 200 रुपये प्रति किलो का दाम मिला है। दाम नहीं मिलने से उत्पादन में भी समस्या हो रही है। वर्ष 2017 से 19 तक क्रमश: 3840.51, 3940 व 4000.27 लाख किलो ग्राम उत्पादन हुआ था। वर्तमान समय में कुल उत्पादन 52 प्रतिशत खुदरा चाय बागानों के अंतर्गत आता है। टाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज बंसल ने कहा कि चाय उद्योग संकट में है। इसका मुख्य कारण खुदरा चाय कृषि व बटलिफ फैक्टरी है। इसलिये खुदरा चाय उद्योग के प्रसार को रोकने व राज्य सरकार से मदद मांगी गई है। टाई के महासचिव प्रवीर भट्टाचार्य ने कहा कि चाय उद्योग को बचाने के लिए संबंधित विभाग से बात की गई है। टाई के डुवार्स शाखा के महासचिव रामावतार शर्मा ने कहा कि चाय उद्योग के हर क्षेत्र में असमांजस्य का दौर है। ऐसे हालात पहले कभी नहीं आए।

Posted By: Jagran

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