- तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस-भाजपा व माकपा ने मिलकर किया बोर्ड गठन संवाद सूत्र, बानरहाट: केंद्र व राज्य में एक-दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी करने व विरोध करने वाली पार्टी पंचायत बोर्ड गठन के लिए एक मंच पर आ गई है। मकसद सिर्फ तृणमूल कांग्रेस सत्ता से किसी तरह दूर रखना है। यही कारण है कि माकपा-कांग्रेस व भाजपा एक साथ आ गई है। बिन्नागुड़ी ग्राम पंचायत का बोर्ड गठन करने के लिए तीनों पार्टी एक हो गई। कुल 23 सीटों वाली बिन्नागुड़ी ग्राम पंचायत में कांग्रेस को 09, भाजपा को 07, तृणमूल कांग्रेस को 06 व माकपा को 01 सीट पर जीत मिली थी। लेकिन कुछ दिनों बाद ही कांग्रेस के चार सदस्य तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बन गई, लेकिन सोमवार को बोर्ड गठन के दौरान माकपा, कांग्रेस व भाजपा ने 13 सदस्यों को लेकर बोर्ड गठन कर लिया। इस दिन मतदान के आधार पर कांग्रेस के दीपक कुमार श्याम को प्रधान व पूनम छेत्री को उप प्रधान के रूप में चुना गया है। प्रधान को 13 वोट मिले। वहीं तृणमूल कांग्रेस की ओर से से प्रधान के लिए खड़ी सुमती उराव के पक्ष में मात्र 10 वोट पड़े। राजनीतिक सूत्रों की माने तो बोर्ड गठन करने के लिए तृणमूल प्रधान व उप प्रधान का पद छोड़ने के लिए भी तैयार थे, लेकिन इसके बावजूद तृणमूल बोर्ड गठन नहीं कर पाई।

ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष बलराम राय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस सत्ता व पैसे के बल पर बार-बार गणतंत्र की हत्या करने की कोशिश की है। इसलिये बिन्नागुड़ी की जनता ने पंचायत चुनाव में तृणमूल को तीसरे स्थान पर भेजकर अपना रोष प्रकट किया। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने पैसे के बल पर विजयी सदस्यों को खरीदने की कोशिश की। लेकिन इसके बावजूद आखिरकार उनलोगों ने बोर्ड गठन किया। किसी व्यक्ति विशेष के स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि बिन्नागुड़ी के हित में बोर्ड गठन किया गया है।

वहीं बिन्नागुड़ी ग्राम पंचायत के तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष सपन राय ने कहा कि तीनों पार्टी अपने हित व स्वार्थ के लिए एक हुई है। जो पार्टी व उसके समर्थक एक-दूसरे को देखना नहीं चाहते है। आज वे लोग एक हो रहे हैं। ये गठबंधन ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं है। भविष्य में जनता इसका जवाब देगी। वहीं बिन्नागुड़ी के मंडल अध्यक्ष उमेश यादव ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को रोकने के लिए ही कांग्रेस को समर्थन दिया गया है। उनलोगों की लड़ाई तृणमूल कांग्रेस से ही है। इसलिये जिला के निर्देश पर तृणमूल कांग्रेस को बोर्ड गठन से रोकने के लिए ही कांग्रेस को समर्थन दिया गया है। माकपा सदस्यों की माने तो तृणमूल कांग्रेस को रोकना ही मुख्य लक्ष्य है।

Posted By: Jagran